बाजार में हाल ही में हुई जबरदस्त अस्थिरता के बाद रेगुलेटर SEBI अब क्लोजिंग ऑक्शन और डेरिवेटिव सेटलमेंट के नियमों में बदलाव की तैयारी कर रहा है। Nifty में चंद सेकंड्स में आए **300 अंकों** के उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्या हुआ था मार्केट में?
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान जबरदस्त वोलैटिलिटी देखी गई। सिर्फ 30 सेकंड के भीतर Nifty 300 अंक उछल गया और फिर तुरंत 240 अंक नीचे गिर गया। इस घटना ने बाजार की प्राइस डिस्कवरी प्रोसेस पर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद रेगुलेटर SEBI ने मामले का संज्ञान लिया है।
सेटलमेंट रूल्स में क्या बदलाव संभव है?
बता दें कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन मैकेनिज्म 3 अगस्त 2026 को लागू किया गया था। लेकिन एक्सपायरी के दिन जिस तरह से कीमतों में अचानक बदलाव देखने को मिला, उसे देखते हुए अब 30-मिनट के 'वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस' (VWAP) मॉडल पर वापस जाने की चर्चा तेज है। रेगुलेटर फिलहाल 20,000 से ज्यादा सुझावों की समीक्षा कर रहा है और अक्टूबर 2026 के अंत तक नए नियमों को लागू किया जा सकता है।
बाजार का हाल और इंस्टीट्यूशनल फ्लो
तकनीकी खराबी के बावजूद बाजार का रुख सकारात्मक रहा। Nifty 1% की तेजी के साथ 22,776 पर बंद हुआ, जबकि Sensex में 685 अंकों का उछाल देखा गया। ग्लोबल लेवल पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) के दाम $100 प्रति बैरल से नीचे आने ने भी बाजार को सपोर्ट दिया। हालांकि, FIIs ने ₹2,961 करोड़ के शेयर बेचे, लेकिन घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹5,089 करोड़ की खरीदारी करके बाजार को संभाले रखा।
निवेशकों के लिए सलाह
जब तक आधिकारिक सर्कुलर नहीं आता, एक्सपायरी के दिनों में अचानक प्राइस डिस्टॉर्शन (Price Distortion) का जोखिम बना रहेगा। निवेशकों को एक्सचेंज और रेगुलेटर के अगले अपडेट पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इससे भविष्य में सेटलमेंट के तरीके पूरी तरह बदल सकते हैं।
