SME IPO: SEBI का बड़ा कदम, सट्टेबाजी रोकने के लिए नियमों में होगा बदलाव

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
SME IPO: SEBI का बड़ा कदम, सट्टेबाजी रोकने के लिए नियमों में होगा बदलाव

SEBI ने SME लिस्टिंग फ्रेमवर्क की समीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। इसका मकसद मार्केट में बढ़ती वोलेटिलिटी (Volatility) और अनुपालन लागत को नियंत्रित करना है। जल्द ही कंसल्टेशन पेपर जारी किया जाएगा, जिसमें गवर्नेंस और मार्केट कैप जैसे मुद्दों पर फोकस होगा।

रेगुलेटर SEBI ने SME सेगमेंट में बढ़ रही सट्टेबाजी और गवर्नेस संबंधी चिंताओं को देखते हुए एक व्यापक समीक्षा की योजना बनाई है। अब जल्द ही एक कंसल्टेशन पेपर पेश किया जाएगा, जिससे यह साफ होगा कि छोटी कंपनियों के लिए कैपिटल जुटाने और रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा के बीच संतुलन कैसे बिठाया जाए।

क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?

वर्तमान में SME IPO के लिए अनुपालन लागत (Compliance Cost) काफी अधिक है, जिससे छोटे व्यवसायों पर दबाव पड़ रहा है। मार्केट में अनचाही तेजी को रोकने के लिए पहले उठाए गए कदम, जैसे कि मिनिमम एप्लीकेशन साइज बढ़ाना, पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुए। इसके बजाय, कई बार रिटेल निवेशकों को लिक्विडिटी की समस्या का सामना करना पड़ा है।

क्या हो सकते हैं अहम बदलाव?

सूत्रों के अनुसार, SEBI अब कुछ बड़े स्ट्रक्चरल बदलावों पर विचार कर रहा है:

  • मार्केट कैपिटलाइजेशन: पात्र कंपनियों के लिए मार्केट कैप लिमिट को ₹4,000 करोड़ तक बढ़ाया जा सकता है।
  • पेड-अप कैपिटल: अधिक स्थापित कंपनियों को ही प्लेटफॉर्म पर लाने के लिए पेड-अप कैपिटल थ्रेसहोल्ड में बदलाव संभव है।
  • संस्थागत कोटा (Institutional Quota): प्रोफेशनल प्राइस डिस्कवरी को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत कोटे को रिस्ट्रक्चर करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि रिटेल बिडिंग के जरिए होने वाली सट्टेबाजी को कम किया जा सके।

फिलहाल, अभी कोई नया नियम लागू नहीं हुआ है। बाजार के जानकारों का मानना है कि ये कड़े नियम लॉन्ग टर्म में SME प्लेटफॉर्म की गुणवत्ता में सुधार लाएंगे। अब सभी की नजरें SEBI के आने वाले कंसल्टेशन पेपर पर टिकी हैं, जो इन प्रस्तावित बदलावों की दिशा तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.