SEBI का बड़ा कदम: ₹5 करोड़ संपत्ति वाले निवेशक अब आसानी से बन सकेंगे 'Accredited Investor'

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का बड़ा कदम: ₹5 करोड़ संपत्ति वाले निवेशक अब आसानी से बन सकेंगे 'Accredited Investor'

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने निवेशकों के लिए 'Accredited Investor' बनने के नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव दिया है। नई योजना के तहत, अब **₹5 करोड़** की संपत्ति वाले व्यक्ति इस श्रेणी में आ सकेंगे, जिससे वे जटिल वित्तीय उत्पादों तक आसानी से पहुंच पाएंगे।

SEBI की नई 'मैनेजर-लेड' स्कीम

SEBI ने हाल ही में एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसमें 'Accredited Investor' के ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव है। इस नई 'मैनेजर-लेड' (Manager-led) प्रणाली का मुख्य उद्देश्य योग्य निवेशकों की संख्या बढ़ाना और उन्हें रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs), इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIFs) जैसे खास वित्तीय उत्पादों तक पहुंच दिलाना है।

अभी तक, निवेशकों को किसी थर्ड-पार्टी एजेंसी से मान्यता लेनी पड़ती थी। लेकिन SEBI की नई योजना के मुताबिक, अब फंड मैनेजर्स खुद निवेशकों की 'Accredited Investor' के तौर पर पहचान कर सकेंगे। एक बार मान्यता मिलने के बाद, यह स्टेटस उसी मैनेजर के साथ 3 साल तक वैध रहेगा, बशर्ते निवेशक योग्यता पूरी करता रहे।

क्या हैं नए नियम?

  • व्यक्तियों के लिए: अब ₹5 करोड़ की सिक्योरिटीज मार्केट एसेट्स (Securities Market Assets) वाले व्यक्ति 'Accredited Investor' माने जाएंगे।
  • कॉर्पोरेट निकायों के लिए: यह सीमा बढ़ाकर ₹20 करोड़ कर दी गई है।

SEBI ने स्पष्ट किया है कि 'Securities Market Assets' में डिमैट इक्विटी, डेट, REITs, InvITs, AIF यूनिट्स, म्यूचुअल फंड, फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट, डिमैट फॉर्म में अनलिस्टेड सिक्योरिटीज और विदेशी बाजार निवेश शामिल होंगे।

क्यों है यह अहम?

इस बदलाव से मौजूदा 96,000 AIF रजिस्टर्ड निवेशकों की तुलना में लगभग 3.7 लाख अतिरिक्त निवेशक 'Accredited Investor' की श्रेणी में आ सकते हैं। साथ ही, भारत में रहने वाले सभी विदेशी व्यक्तियों और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) को भी स्वतः (deemed) 'Accredited Investor' का दर्जा मिल सकता है।

हालांकि, इस नई व्यवस्था में फंड मैनेजर्स पर अपनी अनुपालन (Compliance) प्रक्रियाओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। SEBI का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सेल्फ-सर्टिफिकेशन के बजाय सही जांच-परख के बाद ही निवेशकों को इन जटिल उत्पादों में निवेश की अनुमति मिले।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.