बाजार नियामक SEBI अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सहारा लेने की तैयारी में है। इसके जरिए मार्केट की निगरानी और मजबूत होगी, साथ ही विदेशी निवेशकों (FPIs) के लिए नियमों को सरल बनाने की पहल की जा रही है।
सेबी (SEBI) ने मार्केट सुपरविजन और रिस्क मैनेजमेंट को हाई-टेक बनाने का खाका तैयार कर लिया है। चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने जानकारी दी है कि कंपनी अपना एक घरेलू एआई (AI) मॉडल विकसित कर रही है। इंटरनेशनल ऑर्गेनाइजेशन ऑफ सिक्योरिटीज कमीशन (IOSCO) के टूलकिट्स को शामिल करके, नियामक अब मार्केट में हेरफेर (manipulation) को रियल-टाइम में पकड़ने की अपनी क्षमता को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
विदेशी निवेशकों के लिए आसान होंगी राहें
तकनीकी बदलावों के साथ-साथ, सेबी अब विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए अनुपालन (compliance) के बोझ को कम करने पर काम कर रहा है। वर्तमान नियमों को वैश्विक मानकों के मुकाबले काफी कठिन माना जाता रहा है। अब नियामक एक कंसल्टेशन पेपर ला रहा है, जिसका मकसद ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को सरल बनाना है ताकि भारत में विदेशी निवेश का प्रवाह और तेज हो सके।
डिस्क्लोजर पॉलिसी में बदलाव की तैयारी
अडानी ग्रुप से जुड़े मामलों के बाद सेबी ने ऑफशोर फंड्स के लिए डिस्क्लोजर के नियम काफी सख्त कर दिए थे, जिसका बाजार में काफी विरोध हुआ था। अब नियामक एक संतुलित रुख अपना रहा है। नई पॉलिसी के जरिए मार्केट की अखंडता (integrity) को बनाए रखते हुए निवेश को आकर्षित करने के लिए एक 'मिडल पाथ' तलाशा जा रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सावधानी
AI के इस्तेमाल से जहां दक्षता बढ़ेगी, वहीं कुछ चुनौतियां भी हैं। अगर डेटा की क्वालिटी सही नहीं रही या AI के निर्णयों में पक्षपात हुआ, तो गलत संकेत (false positives) मिल सकते हैं। इससे बाजार में अनचाही अस्थिरता पैदा होने का खतरा बना रहता है। फिलहाल निवेशकों को सेबी के उस आगामी कंसल्टेशन पेपर पर नजर रखनी चाहिए, जिसमें FPI नियमों में बदलाव की विस्तृत जानकारी होगी।
