AI का डबल एज: बाज़ार पर कैसे पड़ेगा असर?
SEBI अब AI के बढ़ते खतरों को लेकर एक खास एडवाइजरी जारी करने की तैयारी में है। चेयरपर्सन तुहिन कांता पांडे ने बताया कि 'Mythos' जैसे एडवांस्ड AI मॉडल्स बाज़ार की अस्थिरता को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं। SEBI के मुताबिक, AI एक दोधारी तलवार की तरह है – यह सिस्टम की कमज़ोरियों को जल्दी ढूंढ सकता है, लेकिन साथ ही उन्हें बड़े पैमाने पर और तेज़ी से इस्तेमाल भी कर सकता है। नई एडवाइजरी बाज़ार के पार्टिसिपेंट्स को AI-संचालित खतरों को पहचानने और उनसे निपटने के तरीके बताएगी।
यह भी बताया गया कि भारत का फाइनेंशियल सर्विसेज सेक्टर साल 2026 तक AI पर होने वाला खर्च दोगुना कर सकता है। हालांकि, AI के इस्तेमाल से जहां फ्रॉड डिटेक्शन और कस्टमर सर्विस बेहतर हो सकती है, वहीं यह ख़तरा भी है कि कोई कमज़ोरी सामने आने और उसका गलत इस्तेमाल होने के बीच का समय 72 घंटे से भी कम रह सकता है।
प्राइवेट क्रेडिट, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और KYC पर भी SEBI की नज़र
AI के अलावा, SEBI भारतीय वित्तीय बाज़ार के कई और अहम हिस्सों पर भी काम कर रहा है। चेयरपर्सन पांडे ने साफ किया कि भारत का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट रेगुलेटरी सेफ्टी नेट के चलते काफी सुरक्षित है। यहां रिटेल इन्वेस्टर्स की सीधी पहुंच को सीमित रखा गया है और मिनिमम इन्वेस्टमेंट की ज़रूरत ज़्यादा है।
कमोडिटी डेरिवेटिव्स में बड़े इंस्टिट्यूशनल इन्वेस्टर्स की एंट्री को लेकर RBI और IRDAI ने कुछ चिंताएं जताई हैं। इन रेगुलेटर्स का मानना है कि कमोडिटी डेरिवेटिव्स की वोलेटिलिटी इंश्योरेंस कंपनियों जैसे लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स की ज़रूरत से मेल नहीं खाती।
वहीं, 'वन KYC' यानी CKYC 2.0 सिस्टम पर काम तेज़ी से चल रहा है। उम्मीद है कि इस यूनिफाइड कस्टमर ऑनबोर्डिंग प्लेटफॉर्म का टेक्नोलॉजी वाला हिस्सा जुलाई तक लगभग पूरा हो जाएगा।
'बैलेंस्ड रेगुलेशन' पर SEBI का फोकस
फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने AI को 'अनप्रेसिडेंटेड थ्रेट' यानी अभूतपूर्व खतरा बताया है। ऐसे में, SEBI का फॉरवर्ड-लुकिंग एजेंडा 'बैलेंस्ड रेगुलेशन' पर आधारित है, जिसका मकसद बाज़ार के विकास को बढ़ावा देना और साथ ही इन्वेस्टर्स के भरोसे और मज़बूत जोखिम प्रबंधन को बनाए रखना है। आने वाली AI एडवाइजरी किसी तरह के प्रतिबंध के बजाय ज़िम्मेदार इनोवेशन को बढ़ावा देने की रणनीति का पहला कदम है।
