SEBI ने 2014-15 के दौरान BSE पर हुए इललिक्विड स्टॉक ऑप्शंस (Illiquid Stock Options) से जुड़े मामलों को निपटाने की तैयारी कर ली है। रेगुलेटर इन पुराने केसों के लिए चौथी सेटलमेंट स्कीम लाने जा रहा है।
पुराने कानूनी विवादों का होगा अंत
SEBI उन हजारों पुराने मामलों को बंद करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है जो साल 2014 से 2015 के बीच 'नॉन-जेन्युइन रिवर्सल ट्रेड्स' (Non-genuine reversal trades) से जुड़े थे। इस स्कीम के जरिए उन एंटिटीज को राहत मिलेगी जो लंबे समय से कानूनी कार्रवाई का सामना कर रही हैं। यह इस तरह का चौथा मौका होगा, इससे पहले 2020, 2022 और 2024 में भी ऐसी विंडो खोली जा चुकी है।
सेटलमेंट का तरीका
इस प्रक्रिया के तहत, संबंधित पक्ष एक तय सेटलमेंट अमाउंट और जरूरी फीस का भुगतान करके विवादों को हमेशा के लिए खत्म कर सकते हैं। सबसे बड़ी राहत यह है कि इसमें किसी भी पक्ष को अपना जुर्म या गलती स्वीकार नहीं करनी होगी। इससे न केवल कानूनी खर्च बचेगा, बल्कि प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। उम्मीद है कि इस योजना का आधिकारिक ऐलान नवंबर 2026 के अंत तक हो जाएगा।
नियमों में बदलाव की तैयारी
यह कदम SEBI के उस बड़े रिफॉर्म का हिस्सा है, जिसके तहत रेगुलेटर अपनी 'सेटलमेंट प्रोसीडिंग्स रेगुलेशंस' (Settlement Proceedings Regulations) को आधुनिक बना रहा है। रेगुलेटर ने हाल ही में पेनल्टी कैलकुलेशन और सेटलमेंट की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव रखा है। आने वाले समय में, यह विंडो तीन महीने के लिए खुली रह सकती है, जिसकी पूरी गाइडलाइन्स जल्द ही जारी की जाएंगी।
