SEBI ने 2026 के नए सेटलमेंट नियमों को नोटिफाई कर दिया है, जो 2018 के पुराने फ्रेमवर्क की जगह लेंगे। अब कंपनियों को रेगुलेटरी पेनल्टी और अवैध मुनाफे (disgorgement) को अलग-अलग चुकाना होगा।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने 6 अक्टूबर 2026 को 'Settlement of Administrative and Civil Proceedings Regulations, 2026' का ऐलान किया है। यह नया फ्रेमवर्क अगले 30 दिनों में लागू हो जाएगा और पुराने 2018 के नियमों को पूरी तरह बदल देगा।
क्या है सबसे बड़ा बदलाव?
अब तक सेटलमेंट की रकम में रेगुलेटरी जुर्माना और गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे आपस में मिले हुए होते थे। नए नियमों के तहत, कंपनियों को अब 'सेटलमेंट अमाउंट' और 'डिस्गॉर्जमेंट' (गलत मुनाफे की वापसी) को दो अलग-अलग हेड में दिखाना होगा। इसका सीधा मतलब यह है कि निवेशकों का पैसा उन्हें वापस लौटाने के लिए अब अलग से फंड तय होगा, जबकि प्रशासनिक जुर्माना अलग होगा।
फॉर्मूले से तय होगा जुर्माना
रेगुलेटर ने अब पारदर्शिता लाने के लिए एक फॉर्मूला-आधारित सिस्टम पेश किया है। यह फॉर्मूला उल्लंघन की गंभीरता और केस की स्टेज के आधार पर तय होगा, जिससे कंपनियों को पहले ही पता चल सकेगा कि उन्हें कितनी वित्तीय चोट लग सकती है।
छोटे मामलों के लिए 'फास्ट ट्रैक'
₹10 लाख तक के छोटे मामलों के लिए रेगुलेटर ने 'फास्ट-ट्रैक' रास्ता खोला है, जिससे कानूनी प्रक्रिया जल्दी पूरी हो सकेगी।
क्या बढ़ेगा कंपनियों का खर्च?
हालांकि नए नियम स्पष्टता लाते हैं, लेकिन यह कंपनियों के लिए महंगा साबित हो सकता है। गलत मुनाफे (wrongful gains) की वापसी अब पूरी तरह अनिवार्य है और इसमें कोई मोल-भाव नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, अपनी इंटरनल ऑडिट और कंट्रोल सिस्टम को इन नए नियमों के अनुरूप ढालने के लिए कंपनियों को शुरुआत में Compliance Cost का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ सकता है।
