SEBI ने मार्केट को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए कई अहम बदलाव किए हैं। वॉल्ट मैनेजर्स के लिए कड़े नियमों से लेकर एडवरटाइजिंग कोड तक, ये सुधार रिटेल निवेशकों पर से निगरानी का बोझ कम करेंगे और पूरे फाइनेंशियल इकोसिस्टम में पारदर्शिता लाएंगे।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने मार्केट की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। इन तकनीकी बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह है कि निवेशकों को निवेश से जुड़ी जटिलताओं और रिस्क से बचाया जा सके और जिम्मेदारी बिचौलियों (Intermediaries) पर तय की जाए।
फिजिकल एसेट की सुरक्षा
गोल्ड और सिल्वर एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETFs) में निवेश करने वालों के लिए बड़ा अपडेट है। SEBI ने वॉल्ट मैनेजर्स के लिए नेट वर्थ की अनिवार्यता को ₹50 करोड़ से बढ़ाकर ₹75 करोड़ कर दिया है। इससे फिजिकल एसेट्स की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और ऑपरेशनल फेलियर का रिस्क कम होगा।
भ्रामक विज्ञापनों पर लगाम
10 अक्टूबर, 2026 से लागू नए 'कॉमन एडवरटाइजिंग कोड' के जरिए फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स के मार्केटिंग के तरीके को बदला जा रहा है। सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं ताकि मार्केटिंग के नाम पर निवेशकों को गुमराह न किया जा सके। अब निवेशकों का ध्यान निवेश के फंडामेंटल्स पर केंद्रित रहेगा।
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में आसानी
SEBI ने 24 सितंबर, 2026 को नए पोर्टफोलियो मैनेजर रेगुलेशंस को मंजूरी दी है, जो 1 अप्रैल, 2027 से प्रभावी होंगे। इसमें PRIM (Portfolio Managers Route for Investing in Mutual Funds) के तहत पोर्टफोलियो मैनेजर ₹25 लाख के टिकट साइज के साथ सीधे म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगे।
सेटलमेंट अब फॉर्मूला आधारित
मार्केट में कदाचार (misconduct) रोकने के लिए SEBI ने एक नया फॉर्मूला-आधारित सेटलमेंट फ्रेमवर्क पेश किया है। ₹10 लाख तक के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म बनाया गया है। अब पेनल्टी और सेटलमेंट के नियम पहले से अधिक स्पष्ट और पारदर्शी होंगे, जिससे गलत काम करने वालों पर लगाम लगेगी।
हालांकि ये नियम सुरक्षा के लिहाज से बहुत अच्छे हैं, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि बाजार का रिस्क हमेशा बना रहता है। फिलहाल, इन नए सुधारों के असर और उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर नजर रखना जरूरी है।
