SEBI का बड़ा फैसला: इलिक्विड ऑप्शन ट्रेडिंग केस निपटाने के लिए खुला चौथा सेटलमेंट विंडो

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: इलिक्विड ऑप्शन ट्रेडिंग केस निपटाने के लिए खुला चौथा सेटलमेंट विंडो

SEBI ने 2014-2015 के दौरान BSE पर हुए इलिक्विड स्टॉक ऑप्शन ट्रेड से जुड़े पुराने मामलों को सुलझाने के लिए एक और सेटलमेंट विंडो खोली है। अब कंपनियां तय फीस देकर कानूनी पचड़ों से मुक्ति पा सकती हैं।

सेबी ने उन पुराने मामलों को निपटाने की तैयारी कर ली है, जहां 1 अप्रैल 2014 से 30 सितंबर 2015 के बीच बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर इलिक्विड स्टॉक ऑप्शन में 'आर्टिफिशियल ट्रेडिंग' के आरोप लगे थे। इन ट्रेड्स को नियामक ने 'नॉन-जेनुइन' माना था क्योंकि इनसे बाजार में नकली वॉल्यूम बनाने की कोशिश की गई थी।

कानूनी पचड़ों से छुटकारा

इस मामले में हजारों मार्केट एंटिटीज के खिलाफ कानूनी कार्यवाही चल रही है, जिसके चलते 'सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल' (SAT) में केसों का अंबार लग गया था। अब सेबी ने एक बार फिर सेटलमेंट का मौका दिया है, जिससे कंपनियां लंबी कानूनी लड़ाई से बच सकती हैं।

सेटलमेंट फीस का गणित

सेटलमेंट की फीस ट्रेडिंग कॉन्ट्रैक्ट्स की संख्या पर निर्भर करेगी:

  • 1 से 5 कॉन्ट्रैक्ट: ₹1.44 लाख की फिक्स्ड फीस।
  • 6 से 50 कॉन्ट्रैक्ट: ₹2.88 लाख की फीस।
  • 51 कॉन्ट्रैक्ट या उससे ज्यादा: शुरुआती ₹7.2 लाख + हर अतिरिक्त कॉन्ट्रैक्ट पर ₹14,400 का चार्ज। (उदाहरण के तौर पर, 51 कॉन्ट्रैक्ट होने पर कुल ₹14.544 लाख की देनदारी बनेगी)।

क्यों लिया गया यह फैसला?

'हाई पावर एडवाइजरी कमेटी' की सिफारिशों पर अमल करते हुए सेबी ने चौथी बार यह विंडो दी है। इससे पहले 2020, 2022 और 2024 में भी ऐसे मौके दिए गए थे। इसका मुख्य मकसद कोर्ट और ट्रिब्यूनल पर बढ़ते मुकदमों के बोझ को कम करना है। आने वाले दिनों में नियामक आवेदन प्रक्रिया और दिशा-निर्देश जारी करेगा ताकि 'SEBI Act 1992' के तहत इन मामलों को समयबद्ध तरीके से बंद किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.