SEBI, इंश्योरेंस रेगुलेटर के साथ मिलकर अब Consolidated Account Statement (CAS) में पॉलिसी डेटा जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसका मकसद निवेशकों को एक ही जगह पर उनके सभी फाइनेंशियल एसेट्स का पूरा ब्योरा देना है।
अब फाइनेंशियल प्लानिंग होगी और भी आसान
SEBI का लक्ष्य भारतीय निवेशकों के लिए पर्सनल फाइनेंस को एक प्लेटफॉर्म पर लाना है। वर्तमान में, CAS केवल डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड की जानकारी देता है, लेकिन अब इसमें इंश्योरेंस पॉलिसी की डिटेल्स भी शामिल की जाएंगी। यह कदम 'अकाउंट एग्रीगेटर' (Account Aggregator) फ्रेमवर्क के जरिए उठाया जाएगा, जो एक डिजिटल पुल के रूप में काम करता है। इससे निवेशक अपनी बैंक डिपॉजिट, स्टॉक होल्डिंग्स और इंश्योरेंस कवरेज को एक ही जगह देख पाएंगे। हालांकि, इतनी सारी फाइनेंशियल जानकारी एक जगह आने से डेटा प्राइवेसी और सुरक्षा का महत्व काफी बढ़ गया है।
अन्य बड़े रिफॉर्म्स और चर्चाएं
रेगुलेटर इसके अलावा 'स्टॉक लेंडिंग एंड बॉरोइंग' (Stock Lending and Borrowing) मैकेनिज्म को भी आसान बनाने पर काम कर रहा है, जिससे निवेशक अपने खाली पड़े शेयरों से एक्स्ट्रा रिटर्न कमा सकें।
इसके साथ ही, डिजिटल ट्रांजैक्शंस की लागत को लेकर भी बहस जारी है। UPI आधारित ट्रेडिंग पर 0.02% का ट्रांजैक्शन शुल्क (Merchant Discount Rate) लगाने की चर्चा थी, जिसका ब्रोकरेज फर्मों ने कड़ा विरोध किया है। निवेशकों के हित को देखते हुए, NPCI ने फिलहाल इस फैसले को दिवाली तक टाल दिया है। अब देखना यह होगा कि इस शुल्क पर अंतिम फैसला क्या आता है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ट्रेडिंग कॉस्ट पर असर डालेगा।
