24 सितंबर को होने वाली SEBI की बोर्ड मीटिंग में बाजार सुधारों पर बड़ा मंथन होगा। इसमें कानूनी सेटलमेंट की प्रक्रिया तेज करने, पोर्टफोलियो मैनेजरों को अधिक छूट देने और विदेशी निवेशकों के लिए कमोडिटी मार्केट के दरवाजे खोलने जैसे अहम प्रस्ताव शामिल हैं।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) 24 सितंबर, 2026 को एक अहम बोर्ड मीटिंग करने जा रहा है, जिसमें बाजार की कार्यप्रणाली को सरल बनाने और निवेश के दायरे को बढ़ाने के लिए कई बड़े नीतिगत बदलावों पर चर्चा की जाएगी।
सेटलमेंट प्रक्रिया में बड़ा बदलाव
SEBI का मुख्य फोकस कानूनी सेटलमेंट को आसान बनाने पर है। ₹10 लाख तक के उल्लंघन के मामलों के लिए एक फास्ट-ट्रैक रास्ता शुरू करने का प्रस्ताव है, ताकि पेंडिंग मामलों का निपटारा तेजी से हो सके। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट या सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) में लंबित मामलों के लिए भी सेटलमेंट आवेदन की अनुमति देने पर विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, सेटलमेंट फाइलिंग की विंडो को 60 दिन से बढ़ाकर 90 दिन करने और दोबारा आवेदन पर लगने वाली पेनल्टी को 50% से घटाकर 20% करने का सुझाव भी दिया गया है।
PMS और मार्केट एक्सेस में नई छूट
पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के लिए नियमों में लचीलापन लाने की तैयारी है। इसके तहत 'म्यूचुअल फंड-ओनली' कैटेगरी बनाने का प्रस्ताव है। साथ ही, डिस्क्रीशनरी पोर्टफोलियो मैनेजरों को अब 10% तक का निवेश इन्वेस्टमेंट-ग्रेड वाले अनलिस्टेड डेट में करने की अनुमति मिल सकती है। हालांकि, निवेशकों को ध्यान रखना चाहिए कि अनलिस्टेड डेट में लिक्विडिटी की समस्या हो सकती है।
FPI के लिए कमोडिटी मार्केट के नए रास्ते
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPI) के लिए भारतीय बाजार को और खोलने की कोशिश हो रही है। उन्हें नॉन-एग्रीकल्चरल कमोडिटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स और फिजिकल सेटल होने वाले नॉन-एग्रीकल्चरल कॉन्ट्रैक्ट्स में भाग लेने की इजाजत मिल सकती है। इसके अलावा, रेगुलेटेड एंटिटीज के लिए विज्ञापन कोड, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट और REITs व InvITs की डिपॉजिटरी रिसीट्स को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रेड करने जैसे मुद्दों पर भी बोर्ड अपनी मुहर लगा सकता है।
