SEBI लाया स्पेशल विंडो! फिजिकल शेयर को Demat कराने का एक साल का मौका

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Author Neha Patil | Published at:
SEBI लाया स्पेशल विंडो! फिजिकल शेयर को Demat कराने का एक साल का मौका
Overview

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने निवेशकों के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। SEBI ने 5 फरवरी, 2026 से 4 फरवरी, 2027 तक एक स्पेशल विंडो खोली है, जिसके तहत 1 अप्रैल, 2019 से पहले खरीदे या बेचे गए फिजिकल शेयर को Demat कराया जा सकता है। यह सुविधा उन निवेशकों के लिए भी है जिनके ट्रांसफर रिक्वेस्ट पहले रिजेक्ट हो गए थे, लेकिन सफल ट्रांसफर पर **एक साल** का लॉक-इन लागू होगा।

SEBI का बड़ा ऐलान: फिजिकल शेयरधारकों के लिए खुला मौका

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने शेयर बाजार में बड़ा बदलाव लाते हुए फिजिकल शेयर को Demat कराने के लिए एक साल की स्पेशल विंडो खोली है। यह स्पेशल विंडो 5 फरवरी, 2026 से शुरू होकर 4 फरवरी, 2027 तक चलेगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य उन निवेशकों को राहत देना है जिनके पास 1 अप्रैल, 2019 से पहले खरीदे या बेचे गए फिजिकल शेयर हैं, और वे उन्हें इलेक्ट्रॉनिक (Demat) फॉर्म में बदलना चाहते हैं।

कंपनियां जैसे Birla Cable Limited अपने शेयरधारकों को इस सुविधा के बारे में सक्रिय रूप से सूचित कर रही हैं। यह खास मौका उन निवेशकों के लिए भी है जिनके फिजिकल शेयर ट्रांसफर रिक्वेस्ट पहले डॉक्यूमेंट्स की कमी या अन्य कारणों से रिजेक्ट हो गए थे।

कैसे होगा Demat? ये हैं ज़रूरी चीज़ें

इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए, निवेशकों को कुछ ज़रूरी दस्तावेज अपने कंपनी के रजिस्ट्रार और शेयर ट्रांसफर एजेंट (जैसे Birla Cable के मामले में MUFG Intime India Pvt. Ltd.) के पास जमा कराने होंगे। इन दस्तावेजों में ओरिजिनल शेयर सर्टिफिकेट, ट्रांसफर डीड, खरीद का प्रमाण, केवाईसी (KYC) डॉक्यूमेंट्स और एक ताज़ा क्लाइंट मास्टर लिस्ट (Client Master List) शामिल हैं।

एक अहम शर्त यह है कि सफलतापूर्वक ट्रांसफर किए गए सभी शेयर ट्रांसफरी (खरीदने वाले) के Demat अकाउंट में क्रेडिट कर दिए जाएंगे और वे ट्रांसफर की तारीख से एक साल की अवधि के लिए लॉक-इन (Lock-in) रहेंगे। यानी, एक साल तक इन शेयरों को बेचा या ट्रांसफर नहीं किया जा सकेगा।

ये मामले शामिल नहीं होंगे

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जिन मामलों में ट्रांसफरर (बेचने वाले) और ट्रांसफरी (खरीदने वाले) के बीच कोई विवाद है, या जिन सिक्योरिटीज को पहले ही इन्वेस्टर एजुकेशन एंड प्रोटेक्शन फंड (IEPF) में ट्रांसफर किया जा चुका है, वे इस विंडो के दायरे से बाहर रहेंगे।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

SEBI की इस पहल से निवेशकों को काफी सहूलियत होगी। फिजिकल शेयर अक्सर ट्रेड करने में मुश्किल होते हैं और धोखाधड़ी का खतरा भी बना रहता है। Demat सिस्टम में आने से इन्हें संभालना, ट्रांसफर करना और बेचना आसान हो जाएगा। यह कदम निवेशक सुरक्षा को बढ़ाने के साथ-साथ कंपनियों को भी अपने रिकॉर्ड बेहतर रखने में मदद करेगा। हालांकि, एक साल के लॉक-इन पीरियड के कारण निवेशकों को मध्यम अवधि के लिए निवेश बनाए रखना होगा।

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