SEBI ने जारी किए नए नियम
SEBI का ये फैसला इंडेक्स प्रोवाइडर्स रेगुलेशन, 2024 का हिस्सा है। इसके तहत, अगर किसी इंडेक्स को ट्रैक करने वाले भारतीय म्यूचुअल फंड की औसत डेली AUM (Asset Under Management) ₹20,000 करोड़ से ज्यादा है, तो उस इंडेक्स प्रोवाइडर को SEBI के पास रजिस्ट्रेशन कराना होगा। ये असेसमेंट साल में दो बार किया जाएगा।
मार्केट ग्रोथ और ग्लोबल ट्रेंड
पिछले कुछ सालों में भारत के म्यूचुअल फंड सेक्टर में भारी ग्रोथ देखी गई है, जहां कुल AUM मार्च 2026 तक करीब ₹73.73 ट्रिलियन तक पहुँच गया था। यह ग्रोथ पैसिव फंड्स, हाइब्रिड और इक्विटी फंड्स के कारण हुई है, जिन्होंने इंडेक्स प्रोवाइडर्स को काफी प्रभावशाली बना दिया है। ग्लोबल लेवल पर भी यूरोप का EU Benchmarks Regulation और यूके के नियम इंडेक्स मेथोडोलॉजी को कंट्रोल करते हैं, वहीं US SEC भी इस पर विचार कर रहा है। SEBI का ये कदम इसी ग्लोबल ट्रेंड के साथ तालमेल बिठाता है।
संभावित चुनौतियाँ
हालांकि, इस नए नियम से इंडेक्स प्रोवाइडर्स के लिए कंप्लायंस कॉस्ट बढ़ सकती है, जिससे छोटे फर्म्स को मुश्किल हो सकती है या निवेशकों पर खर्च बढ़ सकता है। ₹20,000 करोड़ का AUM थ्रेशोल्ड बड़े इंडेक्स को टारगेट करता है, लेकिन कुछ छोटे लेकिन महत्वपूर्ण निश (niche) बेंचमार्क छूट सकते हैं।
रजिस्ट्रेशन की समय-सीमा
जिन इंडेक्स प्रोवाइडर्स को 'महत्वपूर्ण इंडेक्स' मैनेज करने वाला पाया जाएगा, उन्हें नियम लागू होने के छह महीने के अंदर SEBI में रजिस्टर करना होगा। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा महत्वपूर्ण बेंचमार्क के रूप में पहले से पहचाने गए एंटिटीज को इसमें छूट मिलेगी। उम्मीद है कि ये बदलाव भारत में पैसिव इन्वेस्टिंग के लिए एक भरोसेमंद माहौल बनाएंगे और निवेशक विश्वास को बढ़ाएंगे।
