SEBI ने सभी Online Bond Platform Providers (OBPPs) के लिए 'Credit Risk-o-Meter' अनिवार्य कर दिया है। **7 अक्टूबर, 2026** से लागू होने वाले इस नए नियम के तहत, अब अनसिक्योर्ड (unsecured) डेट इंस्ट्रूमेंट्स को बोल्ड रेड टेक्स्ट में दिखाना होगा ताकि रिटेल निवेशक जोखिम को आसानी से समझ सकें।
सेबी (SEBI) ने डेट मार्केट में रिटेल निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। 7 अक्टूबर, 2026 को जारी सर्कुलर के अनुसार, सभी ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स को अपनी वेबसाइट और ऐप पर अब 'Credit Risk-o-Meter' दिखाना होगा। यह टूल बॉन्ड के क्रेडिट रिस्क को 6 अलग-अलग लेवल्स में बांटेगा, जिससे निवेशकों को यह समझने में आसानी होगी कि बॉन्ड में डिफॉल्ट का खतरा कितना है।\n\n### अनसिक्योर्ड डेट पर कड़ी नजर\n\nसिर्फ रिस्क मीटर ही नहीं, सेबी ने 'अनसिक्योर्ड' डेट इंस्ट्रूमेंट्स को लेकर भी खास नियम बनाए हैं। ऐसे बॉन्ड जिनमें कोई कोलेटरल (collateral) नहीं होता, उन्हें अब बोल्ड रेड टेक्स्ट में हाईलाइट करना होगा। कई बार ज्यादा यील्ड (yield) के लालच में निवेशक इस बड़े रिस्क को नजरअंदाज कर देते हैं, अब इसे साफ तौर पर स्क्रीन पर देखना अनिवार्य होगा।\n\n### निवेशकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?\n\nहालांकि ये टूल्स पारदर्शिता तो लाते हैं, लेकिन ये निवेश की सुरक्षा की 100% गारंटी नहीं हैं। निवेशकों को हमेशा यील्ड और प्रिंसिपल के जोखिम के बीच का अंतर समझना चाहिए। इसके अलावा, लिक्विडिटी रिस्क (liquidity risk) भी एक बड़ा फैक्टर है। कई बार कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत कम होता है, जिससे मैच्योरिटी से पहले एग्जिट करना मुश्किल हो सकता है। साथ ही याद रखें, मार्केट के इंटरेस्ट रेट्स बढ़ने पर बॉन्ड की कीमतें गिर सकती हैं, जिसका सीधा असर आपके पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।\n\nनिवेशकों को सलाह दी जाती है कि निवेश से पहले प्लेटफॉर्म की वैधता जरूर जांचें और यह सुनिश्चित करें कि वह एक रजिस्टर्ड स्टॉकब्रोकर के तौर पर काम कर रहा है।
