SEBI का नया फरमान: Debt Securities में अब दिखेगा रंगीन 'रिस्क मीटर', निवेश से पहले जानें नियम

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI का नया फरमान: Debt Securities में अब दिखेगा रंगीन 'रिस्क मीटर', निवेश से पहले जानें नियम

SEBI ने Debt Securities के लिए अनिवार्य 6-स्तरीय 'Credit Risk-o-Meter' पेश किया है। अब निवेशकों को निवेश का जोखिम समझने के लिए ट्रैफिक-लाइट जैसा विजुअल सिस्टम मिलेगा, जिसे **45 दिनों** के भीतर लागू करना होगा।

यह रिस्क मीटर कैसे काम करेगा?

SEBI के नए सर्कुलर के अनुसार, डेट इंस्ट्रूमेंट्स को जोखिम के आधार पर 6 स्तरों में बांटा जाएगा, जो ट्रैफिक लाइट जैसे रंगों के जरिए समझाए जाएंगे। इसमें 'AAA' जैसे हाई-रेटेड बॉन्ड्स को हरा (Green) संकेत मिलेगा, जबकि 'B', 'C' या 'D' रेटिंग वाले जोखिम भरे बॉन्ड्स को लाल (Red) निशान दिया जाएगा।\n\nरेगुलेटर ने सुरक्षा के लिहाज से कड़े नियम बनाए हैं। अगर किसी सिक्योरिटीज की एक से ज्यादा रेटिंग है, तो मीटर में सबसे कम रेटिंग को ही दिखाया जाएगा। साथ ही, सभी 'Unsecured' डेट इंस्ट्रूमेंट्स के लिए 'Unsecured' शब्द को बोल्ड लाल अक्षरों में लिखना अनिवार्य होगा, ताकि निवेशकों को स्पष्ट पता चले कि इसमें कोई गारंटी नहीं है।\n\n### लागू करने की समयसीमा

इश्यूअर्स और ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स को इस बदलाव को अमल में लाने के लिए 45 दिन का समय दिया गया है। यह नियम उन सभी लिस्टेड और लिस्ट होने वाली डेट सिक्योरिटीज पर लागू होगा। अब से ऑफर डॉक्यूमेंट्स, विज्ञापन और डिजिटल इंटरफेस पर यह रिस्क मीटर साफ-साफ दिखना चाहिए।\n\nइसके अलावा, यदि कोई कंपनी 'Issuer Not Cooperating' की श्रेणी में आती है, तो उसे भी रिस्क मीटर पर एक तीर के निशान के साथ बताना होगा।\n\n### निवेशकों के लिए सावधानी

यह समझना जरूरी है कि 'Credit Risk-o-Meter' केवल क्रेडिट रिस्क (डिफॉल्ट की संभावना) बताता है। यह बाजार में आने वाले ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव या लिक्विडिटी के जोखिम को कवर नहीं करता है। विशेष रूप से AT1 बॉन्ड्स जैसे जटिल उत्पादों के मामले में, सेबी ने स्पष्ट किया है कि निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह मीटर मूलधन (Principal) के नुकसान की पूरी गारंटी नहीं देता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.