SEBI का बड़ा फैसला: अब साल में 2 बार डायरेक्टर्स को करनी होगी ट्रेनिंग, जानें क्यों?

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: अब साल में 2 बार डायरेक्टर्स को करनी होगी ट्रेनिंग, जानें क्यों?
Overview

भारतीय शेयर बाज़ार नियामक SEBI (सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस को मज़बूत करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब से कंपनीज़ के इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को साल में कम से कम **दो बार** ट्रेनिंग लेना अनिवार्य होगा। यह फैसला HDFC Bank के चेयरमैन के इस्तीफे के बाद गवर्नेंस को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच आया है।

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गवर्नेंस में सुधार की मंशा

SEBI कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर लगातार फोकस कर रहा है। हाल ही में HDFC Bank के चेयरमैन के अचानक इस्तीफे ने इस बात पर सवाल उठाए थे कि कैसे बोर्ड और डायरेक्टर्स कंपनियों का प्रभावी ढंग से निरीक्षण (oversight) करते हैं। इसी को देखते हुए SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि रेगुलेटर का लक्ष्य 'निरंतर, संरचित और सहयोगात्मक सीखने' के ज़रिए डायरेक्टर्स के कौशल (skills) का निर्माण करना है, जो जटिल व्यावसायिक और नियामक मुद्दों से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।

क्या हैं नए नियम?

नए नियमों के तहत, इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स को साल में कम से कम दो बार ट्रेनिंग सत्रों में भाग लेना होगा। संभव है कि पांच साल के कार्यकाल के बाद दोबारा नियुक्ति (reappointment) के लिए इस ट्रेनिंग को पूरा करना ज़रूरी हो जाए। यह व्यवस्था चार्टर्ड अकाउंटेंसी जैसे प्रोफेशन के लिए आवश्यक निरंतर व्यावसायिक शिक्षा (continuous professional education) की तरह है। जबकि अमेरिका में यह सार्वभौमिक रूप से अनिवार्य नहीं है, वहां भी बाजार निकायों द्वारा इसे प्रोत्साहित किया जाता है। यूके का फाइनेंशियल रिपोर्टिंग काउंसिल भी डायरेक्टर की क्षमता (competency) को बढ़ावा देता है। यह बदलाव इस बात का संकेत देता है कि डायरेक्टorship सिर्फ एक पद नहीं, बल्कि निरंतर कौशल विकास की मांग करती है।

डायरेक्टर्स क्या सीखेंगे?

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) और बॉम्बे चार्टर्ड अकाउंटेंट्स सोसाइटी (BCAS) ट्रेनिंग की सामग्री तैयार कर रहे हैं। इसमें नए नियम, कंपनी के सर्वोत्तम हित में काम करने के डायरेक्टर्स के कर्तव्य, मज़बूत जोखिम प्रबंधन (risk management), और टेक्नोलॉजी व साइबर जोखिम जैसी नई चुनौतियां जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे। ट्रेनिंग में गवर्नेंस में विफलता (governance failures) और ऑडिट कमेटियों (audit committees) की अपेक्षाओं पर केस स्टडीज़ भी शामिल हो सकती हैं। यह मौजूदा नियमों से आगे बढ़कर है, जो केवल डायरेक्टर्स को पात्रता (eligibility) पूरी करने और एक डेटाबैंक में पंजीकरण (register) कराने की अनुमति देते हैं।

निवेशक विश्वास को बढ़ावा

यह नया नियामक कदम निवेशक विश्वास (investor confidence) को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने के लक्ष्य से प्रेरित है। यह सुनिश्चित करने में मदद करेगा कि बोर्ड जोखिमों को पहचानने, संबंधित पक्षों (related parties) से जुड़े सौदों की बारीकी से जांच करने और बदलते नियमों के अनुकूल होने के लिए बेहतर ढंग से तैयार हों। उभरते बाज़ारों (emerging markets) में अक्सर अच्छे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और अधिक विदेशी निवेश के बीच एक संबंध देखा जाता है, साथ ही निवेश जोखिम भी कम होता है। शोध बताते हैं कि भारत में मज़बूत कॉर्पोरेट गवर्नेंस ऐतिहासिक रूप से उच्च कंपनी मूल्यांकन (company valuations) और निवेश फंडों (investment funds) से अधिक रुचि से जुड़ा रहा है, हालांकि इन नियमों को लगातार लागू करना अभी भी एक चुनौती है।

चुनौतियां और आलोचनाएं

सकारात्मक उद्देश्यों के बावजूद, कुछ संभावित चुनौतियां भी हैं। सभी कंपनियों, विशेष रूप से छोटी सूचीबद्ध कंपनियों के लिए, द्वि-वार्षिक (biannual) प्रशिक्षण को लागू करने में व्यावहारिक और वित्तीय कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं। कुछ आलोचकों को संदेह है कि केवल प्रशिक्षण में भाग लेने से बोर्ड के निर्णयों और निरीक्षण में उल्लेखनीय सुधार होगा, या यह केवल एक औपचारिकता (box to tick) बनकर रह जाएगा। SEBI के पिछले गवर्नेंस सुधारों से पता चलता है कि उनके वास्तविक प्रभाव अक्सर नियमों के बजाय कड़े प्रवर्तन (enforcement) पर अधिक निर्भर करते हैं। इसके अलावा, एक ही प्रशिक्षण दृष्टिकोण विभिन्न निदेशक भूमिकाओं की विविध जिम्मेदारियों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। इस पहल की सफलता काफी हद तक प्रशिक्षण सामग्री की गुणवत्ता और SEBI की निरंतर निगरानी पर निर्भर करेगी।

आगे का रास्ता

संरचित, निरंतर निदेशक प्रशिक्षण की ओर SEBI का कदम भारत के कॉर्पोरेट गवर्नेंस मानकों को वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं (global best practices) के करीब लाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस पहल से निरंतर सीखने और जिम्मेदारी की संस्कृति को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसके परिणामस्वरूप भारत द्वारा अंतर्राष्ट्रीय निवेश आकर्षित करना जारी रखने पर मज़बूत कंपनियां और अधिक बाज़ार विश्वास मिलेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.