SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने सोशल मीडिया पर मिल रही अनवेरिफाइड फाइनेंशियल सलाहों को लेकर निवेशकों को चेतावनी दी है। देश में डीमैट अकाउंट्स की संख्या **22.5 करोड़** के पार पहुंचने के बीच, रेगुलेटर ने अब सभी स्टॉक ब्रोकर्स के लिए अपने ऐप्स पर जागरूकता संदेश दिखाना अनिवार्य कर दिया है।
5 अक्टूबर 2026 से देश के सभी स्टॉक ब्रोकर्स को अपनी वेबसाइट और ट्रेडिंग ऐप्स पर निवेशक जागरूकता संदेश प्रदर्शित करना अनिवार्य कर दिया गया है। सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) का यह कदम निवेशकों को सोशल मीडिया के माध्यम से दी जा रही अनवेरिफाइड सलाहों के खतरों से बचाने के लिए उठाया गया है। भारत में डीमैट अकाउंट्स की संख्या 22.5 करोड़ होने के बाद रेगुलेटर की यह सख्ती काफी मायने रखती है।
अनवेरिफाइड सलाह का जोखिम
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट रूप से कहा है कि निवेशक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की बातों में आकर अपना पैसा न लगाएं। हालिया आंकड़ों के मुताबिक, करीब 62% निवेशक इन अनवेरिफाइड सोर्स से प्रभावित होते हैं, जिनके पास न तो कोई ट्रैक रिकॉर्ड होता है और न ही सही जानकारी। गलत सलाह के चक्कर में पड़कर नए निवेशक अक्सर बड़ा फाइनेंशियल नुकसान उठा रहे हैं।
AI और लिटरेसी के जरिए निगरानी
SEBI अब सिर्फ चेतावनियों के भरोसे नहीं है। अप्रैल 2026 में शुरू किया गया 'प्रोजेक्ट जागरूक' (Project Jagrook) अब 13 भाषाओं में लोगों को वित्तीय साक्षरता सिखा रहा है। तकनीकी मोर्चे पर, SEBI ने सोशल मीडिया पर भ्रामक कंटेंट को पकड़ने के लिए 'प्रोजेक्ट सुदर्शन' (Project Sudarsan) और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों के विज्ञापनों की जांच के लिए 'R(AI)DAR' जैसे AI टूल्स तैनात किए हैं।
निवेशकों के लिए सलाह
बाजार के शोर और भरोसेमंद डेटा के बीच फर्क करना बेहद जरूरी है। निवेश का कोई भी फैसला लेने से पहले यह जरूर चेक करें कि आपका सलाहकार SEBI के साथ रजिस्टर्ड है या नहीं। भविष्य में रेगुलेटर ऐसी संस्थाओं के खिलाफ और भी सख्त कदम उठा सकता है जो धोखाधड़ी को बढ़ावा दे रही हैं।
