SEBI ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब निवेशक मात्र **₹25 लाख** के निवेश के साथ PRIM रूट के जरिए म्युचुअल फंड, ETF और इंडेक्स फंड में निवेश कर सकेंगे।
क्या है नया नियम?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अपने पुराने 2020 के नियमों को बदलते हुए 'SEBI (Portfolio Managers) Regulations, 2026' को मंजूरी दे दी है। इस नए बदलाव के तहत 'पोर्टफोलियो मैनेजर्स रूट फॉर इन्वेस्टिंग इन म्युचुअल फंड यूनिट्स' (PRIM) पेश किया गया है। अब तक PMS के लिए ₹50 लाख का निवेश अनिवार्य था, जिसे अब घटाकर ₹25 लाख कर दिया गया है।
फीस पर लगाम और सुरक्षा
छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए SEBI ने मैनेजमेंट फीस को 1% पर सीमित (Cap) कर दिया है। इसके अलावा, जो पोर्टफोलियो मैनेजर्स विशेष रूप से इस PRIM रूट के जरिए काम करना चाहते हैं, उनके लिए ₹2 करोड़ की नेट वर्थ होना जरूरी होगा।
निवेश के दायरे में विस्तार
सिर्फ PRIM रूट ही नहीं, बल्कि रेगुलेटर ने PMS के लिए निवेश के मौके भी बढ़ा दिए हैं:
- अब मैनेजर्स IPO, प्राइमरी मार्केट डेट और विदेशी सिक्योरिटीज में पैसा लगा सकेंगे।
- एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स (ETD) की लिमिट को बढ़ाकर AUM का 1.25 गुना कर दिया गया है।
- वहीं, अनलिस्टेड नॉन-कंवर्टिबल डेट में 10% तक निवेश की अनुमति दी गई है, लेकिन इसके लिए ग्राहक की स्पष्ट सहमति जरूरी है।
निवेशकों के लिए जोखिम और सावधानी
जहाँ ये नियम निवेश के रास्ते आसान बनाते हैं, वहीं डेरिवेटिव्स और अनलिस्टेड डेट में निवेश के कारण लिक्विडिटी रिस्क भी बढ़ सकता है। साथ ही, हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के लिए SEBI ने एक ग्रुप की AMC स्कीमों में निवेश को कुल AUM के 25% तक सीमित कर दिया है। निवेशकों को अब यह देखना होगा कि उनके पोर्टफोलियो मैनेजर इन नई सुविधाओं का उपयोग कितनी समझदारी से करते हैं।
