SEBI ने Copthall Mauritius Investment Ltd. (JPMorgan की यूनिट) से ट्रेडिंग बैन हटा लिया है। कंपनी ने कथित रूप से गलत तरीके से कमाए गए **₹2.96 करोड़** नियामक के पास जमा करा दिए हैं। यह कार्रवाई **13 अगस्त, 2026** को BSE सेंसेक्स क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में कथित हेरफेर की जांच के चलते हुई थी। हालांकि, कंपनी पर रेगुलेटरी जांच अभी भी जारी है।
ट्रेडिंग बैन क्यों हटा?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने JPMorgan Chase & Co. से जुड़ी इकाई, Copthall Mauritius Investment Ltd. को फिर से ट्रेडिंग शुरू करने की अनुमति दे दी है। कंपनी ने नियामक के पास ₹2.96 करोड़ जमा किए हैं, जिसे सेबी ने 'गलत तरीके से कमाए गए लाभ' (disgorgement of gains) के रूप में चिन्हित किया था।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 13 अगस्त, 2026 को BSE सेंसेक्स क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान हुई संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा है। SEBI का आरोप है कि Copthall Mauritius और Mansi Share and Stock Broking ने इंडेक्स की क्लोजिंग प्राइस को प्रभावित करने के लिए भारी-भरकम और आक्रामक ऑर्डर दिए थे, ताकि वे अपने मौजूदा डेरिवेटिव पोजीशन से मुनाफा कमा सकें।
यह मामला नया है क्योंकि 3 अगस्त, 2026 को लागू हुए नए CAS फ्रेमवर्क के तहत यह पहली बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। इसी मामले में सेबी ने Mansi Share and Stock Broking से भी लगभग ₹71.65 लाख की राशि जब्त की है।
जांच अभी खत्म नहीं हुई है
भले ही ट्रेडिंग पर लगी रोक हटा दी गई हो, लेकिन जांच अभी भी चल रही है। फिलहाल ये कंपनियां सेबी के साथ सुनवाई (hearings) में हिस्सा ले रही हैं। सेबी अपनी अंतिम कंफर्मेटरी ऑर्डर तभी जारी करेगा जब सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।
निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि यह कार्रवाई केवल मॉरीशस स्थित यूनिट तक सीमित है। इसका J.P. Morgan India Pvt. Ltd. के स्थानीय कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बाजार की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मामले के बाद फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स के लिए नियमों को और सख्त किया जाएगा या क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की गाइडलाइन्स में बदलाव होगा।
