SEBI और NISM मिलकर 22 जुलाई से म्यूचुअल फंड और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) के डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए एक सिंगल सर्टिफिकेशन परीक्षा शुरू कर रहे हैं। सिलेबस को आसान बनाकर और करेंसी डेरिवेटिव्स को हटाकर, रेगुलेटर का लक्ष्य डिस्ट्रीब्यूशन गैप को पाटना और भारत में SIF प्रोडक्ट्स बेचने के लिए योग्य एडवाइजर्स की संख्या बढ़ाना है।
डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए आसान हुई राह
वित्तीय बाजार में एक बड़ी रुकावट को दूर करने के लिए, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज मार्केट्स (NISM) के साथ मिलकर 22 जुलाई से एक नई, एकीकृत सर्टिफिकेशन परीक्षा लॉन्च करने की घोषणा की है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs), जैसे ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स या जटिल पोर्टफोलियो स्ट्रेटेजीज़, को बेचने के लिए योग्य डिस्ट्रीब्यूटर्स की सीमित संख्या की समस्या को हल करना है। इस नई परीक्षा के जरिए, SEBI मौजूदा म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए अपनी सलाहकार सेवाओं का दायरा बढ़ाना आसान बनाना चाहता है।
करेंसी डेरिवेटिव्स का झंझट खत्म, फोकस बढ़ाया
पहले की परीक्षा प्रक्रिया में सबसे बड़ी बाधा करेंसी डेरिवेटिव्स (Currency Derivatives) पर ज़्यादा जोर देना था, जिसे कई डिस्ट्रीब्यूटर्स के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा था। इंडस्ट्री से लगातार आ रही प्रतिक्रियाओं के बाद, SEBI ने नए NISM सीरीज V-D परीक्षा में करेंसी डेरिवेटिव्स को सिलेबस से पूरी तरह हटा दिया है। पहले जहां 30 चैप्टर थे, अब इसे घटाकर लगभग 10 चैप्टर कर दिया गया है।
यह बदलाव इक्विटी (Equity) और इंटरेस्ट-रेट डेरिवेटिव्स (Interest-rate Derivatives) पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित करेगा, जो SIF सेगमेंट के लिए ज़्यादा प्रासंगिक हैं। इसके अलावा, परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग (Negative Marking) को घटाकर 10% कर दिया गया है और म्यूचुअल फंड कॉन्सेप्ट्स (Mutual Fund Concepts) को ज़्यादा वेटेज (Weightage) दिया गया है। इन बदलावों का मकसद ट्रेनिंग की लागत और समय को कम करना है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स (Investment Advisors) SIF स्पेस में आ सकें।
SIF डिस्ट्रीब्यूशन में बड़ा अंतर
फिलहाल भारतीय बाजार में एक बड़ा अंतर देखा जा रहा है। जहां लगभग 1.95 लाख म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स रजिस्टर्ड हैं, वहीं SIFs बेचने के लिए केवल 6,000 के आसपास ही सर्टिफाइड हैं। इससे एसेट मैनेजर्स (Asset Managers) के लिए मुश्किल हो जाती है कि वे निवेशकों तक अपनी कॉम्प्लेक्स और नॉन-ट्रेडिशनल प्रोडक्ट्स पहुंचा सकें।
एंट्री बैरियर (Entry Barrier) को कम करके, इंडस्ट्री को उम्मीद है कि SIF-सर्टिफाइड एडवाइजर्स की संख्या में काफी बढ़ोतरी होगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह सरलीकृत परीक्षा ऑपरेशनल एफिशिएंसी (Operational Efficiency) के लिए एक अच्छा कदम है, लेकिन इसकी असल सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि ये डिस्ट्रीब्यूटर्स क्लाइंट्स को कितनी अच्छी तरह से समझा पाते हैं। SIF प्रोडक्ट्स में अक्सर जटिल स्ट्रेटेजीज़ शामिल होती हैं, जिनके लिए डोमेन नॉलेज (Domain Knowledge) और एथिकल एडवाइजरी स्टैंडर्ड्स (Ethical Advisory Standards) की ज़रूरत होती है ताकि निवेशक इसमें शामिल जोखिमों को समझ सकें।
आगे क्या?
जो डिस्ट्रीब्यूटर्स पहले से मौजूदा नियमों के तहत सर्टिफाइड हैं, वे अपने मौजूदा क्रेडेंशियल्स (Credentials) के साथ काम करते रहेंगे। वहीं, जो केवल म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूशन में रुचि रखते हैं, उनके लिए मौजूदा NISM सीरीज V-A परीक्षा का विकल्प खुला रहेगा।
भविष्य में, निवेशकों और बाजार पर नजर रखने वालों के लिए V-D सर्टिफिकेशन के लिए नए एनरोलमेंट्स (Enrollments) की गति और देश भर में SIF की पैठ में बढ़ोतरी पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। एसेट मैनेजमेंट फर्म्स पहले से ही ट्रेनिंग मॉड्यूल्स (Training Modules) विकसित कर रही हैं ताकि डिस्ट्रीब्यूटर्स को इन प्रोडक्ट्स में ट्रांजिशन (Transition) करने में मदद मिल सके, और यह सुनिश्चित किया जा सके कि एडवाइजर की संख्या में बढ़ोतरी से निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलें।
