SEBI का बड़ा कदम: AI और ग्रामीण शिक्षा से बढ़ाएंगे निवेशक जागरूकता, फ्रॉड पर कसेगा शिकंजा

SEBIEXCHANGE
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SEBI का बड़ा कदम: AI और ग्रामीण शिक्षा से बढ़ाएंगे निवेशक जागरूकता, फ्रॉड पर कसेगा शिकंजा

SEBI यानी भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (Securities and Exchange Board of India) ने वित्तीय वर्ष 2026 में निवेशकों को जागरूक करने के लिए AI-संचालित वॉयस कैंपेन और जमीनी स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम लॉन्च किए हैं। इसका मकसद डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से खुदरा निवेशकों को बचाना और 'SEBI Check' जैसे वेरिफिकेशन टूल्स को बढ़ावा देना है।

AI से लैस 'सेबी चेक' और फ्रॉड पर वार

SEBI अपने निवेशकों को सीधे उनकी अपनी भाषा में जानकारी देने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है। फरवरी 2026 में शुरू हुए इस मल्टीलिंगुअल AI वॉयस कैंपेन को Sarvam AI जैसी कंपनियों के सहयोग से तैयार किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों को यह सिखाना है कि वे असली वित्तीय संस्थाओं को कैसे पहचानें और अपने पैसों को कैसे सुरक्षित रखें। यह कैंपेन 'SEBI Check' टूल और वेरिफाइड UPI हैंडल के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है। ये फीचर्स अक्टूबर 2025 में ही लाए गए थे, जिससे निवेशक पैसा ट्रांसफर करने से पहले किसी भी संस्था का रजिस्ट्रेशन स्टेटस जांच सकें।

इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत AI-जेनरेटेड वॉयस कॉल के जरिए करीब 3.6 लाख निवेशकों तक पहुंचा गया। ये कॉल्स हिंदी, अंग्रेजी और कई क्षेत्रीय भाषाओं में की गईं, जिससे निवेशकों को अपनी पसंदीदा भाषा में सीधे SEBI से जुड़ने और पहचान बदलकर धोखाधड़ी करने वाले स्कीमों से बचने में मदद मिली।

गांव-गांव तक पहुंचेगी वित्तीय साक्षरता

शहरी इलाकों से आगे बढ़कर, SEBI अब ग्रामीण भारत पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है। इसके लिए पंचायती राज मंत्रालय के साथ मिलकर एक 'ट्रेन-द-ट्रेनर' मॉडल अपनाया गया है। इस मॉडल में, स्थानीय ब्लॉक-स्तरीय और ग्राम पंचायत के प्रतिनिधियों को ट्रेन किया जाएगा, जो फिर अपने गांवों में वित्तीय साक्षरता सत्र आयोजित करेंगे।

इन ट्रेनिंग सेशन में लोगों को पर्सनल फाइनेंस मैनेजमेंट, रेगुलेटेड मार्केट्स के काम करने के तरीके और पोंजी स्कीमों व साइबर फ्रॉड से जुड़ी सावधानियों के बारे में सिखाया जाएगा। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में शुरुआती प्रोजेक्ट्स हो चुके हैं, जिनका लक्ष्य गांवों में जागरूकता का एक स्थायी नेटवर्क बनाना है।

शैक्षिक सामग्री में भी सुरक्षा

निवेशकों की सुरक्षा के लिए, SEBI अपनी शैक्षिक सामग्री में भी जोखिमों का प्रबंधन कर रहा है। जुलाई 2026 से, जागरूकता सामग्री में किसी भी मार्केट प्राइस डेटा का इस्तेमाल करने से पहले 30 दिन का लैग (देरी) अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि मार्केट डेटा का गलत इस्तेमाल करके खुदरा निवेशकों को गुमराह न किया जा सके।

इन प्रयासों के बावजूद, खुदरा निवेशक आज भी डिजिटल फ्रॉड, पहचान की चोरी और सोशल मीडिया पर फैलने वाली गलत निवेश सलाह के प्रति संवेदनशील हैं। इन पहलों की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशक इन वेरिफिकेशन टूल्स को कितना अपनाते हैं और इन प्रोग्रामों को भारत के विविध भाषाई और भौगोलिक परिदृश्य में कितनी अच्छी तरह से बढ़ाया जा सकता है। निवेशकों को हमेशा रेगुलेटर द्वारा प्रदान किए गए आधिकारिक वेरिफिकेशन टूल्स पर भरोसा करना चाहिए, न कि सोशल मीडिया या अनऑफिशियल चैनलों से मिली टिप्स पर।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.