SEBI का 'इन्वेस्टर प्रोटेक्शन एंड एजुकेशन फंड' (IPEF) बढ़कर **₹969.8 करोड़** के स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि पिछले फाइनेंशियल ईयर में इसमें से केवल **₹4.7 करोड़** ही खर्च किए गए। बढ़ते डिजिटल फ्रॉड के बीच इस सुस्त फंड यूटिलाइजेशन पर सरकारी गलियारों में सवाल उठ रहे हैं।
फंड का आकार और खर्च का अंतर
SEBI का इन्वेस्टर प्रोटेक्शन एंड एजुकेशन फंड (IPEF) पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। साल 2023 के मुकाबले अब यह फंड 4 गुना बड़ा हो चुका है और इसका कॉर्पस ₹969.8 करोड़ तक पहुंच गया है। लेकिन, डेटा बताता है कि रेगुलेटर ने बीते साल कुल फंड का महज 0.4% यानी केवल ₹4.7 करोड़ ही खर्च किए।
सरकारी रिव्यू और बदलती चुनौतियां
फंड का यह बड़ा हिस्सा 'खाली' पड़ा रहने के कारण सरकारी स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अधिकारी इस बात की समीक्षा कर रहे हैं कि क्या IPEF का मौजूदा मैंडेट आज के दौर के खतरों से निपटने में सक्षम है। जब यह फंड बना था, तब चुनौतियां अलग थीं, लेकिन आज डिजिटल फ्रॉड और बिना लाइसेंस वाले 'फिनफ्लुएंसर्स' (Finfluencers) ने बाजार का जोखिम पूरी तरह बदल दिया है।
क्या है रिटेल निवेशकों की चिंता?
आजकल बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक सोशल मीडिया पर मिलने वाली टिप्स के भरोसे शेयर बाजार में कदम रख रहे हैं। बिना सोचे-समझे लिए गए ये फैसले अक्सर उनके लिए नुकसानदायक साबित होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि SEBI को अब इन जमा पैसों का इस्तेमाल साइबर सिक्योरिटी, फ्रॉड प्रिवेंशन पर यूनिवर्सिटी लेवल की रिसर्च और निवेशकों को डिजिटल खतरों से बचाने के लिए सख्त गाइडलाइंस बनाने में करना चाहिए।
आगे क्या उम्मीद करें?
फिलहाल सरकार इस मामले में कोई बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है, हालांकि अभी तक कोई औपचारिक पॉलिसी सामने नहीं आई है। बाजार के जानकारों की नजर अब इस पर है कि क्या SEBI इन पैसों को मार्केट मैनिपुलेशन रोकने और रिटेल निवेशकों की डिजिटल सुरक्षा के लिए एक बड़े 'डिफेंस बजट' के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू करेगा या नहीं।
