SEBI ने सभी डेट सिक्योरिटीज (Debt Securities) के लिए नया कलर-कोडेड 'Credit Risk-o-Meter' अनिवार्य कर दिया है। अब निवेशकों को निवेश करने से पहले ही डिफॉल्ट जोखिम का पता चल सकेगा, जिसमें अनसिक्योर्ड इंस्ट्रूमेंट्स के लिए खास चेतावनी भी शामिल है।
पारदर्शी निवेश की ओर SEBI का कदम
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने डेट मार्केट में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। अब नॉन-कनवर्टिबल सिक्योरिटीज, कमर्शियल पेपर्स और मार्केट-लिंक्ड डिबेंचर्स जैसे इंस्ट्रूमेंट्स के लिए 'Credit Risk-o-Meter' दिखाना अनिवार्य होगा। यह टूल जटिल फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स और निवेशकों के बीच की दूरी को कम करेगा।
कैसे काम करेगा यह मीटर?
यह मीटर 6 अलग-अलग स्तरों में जोखिम को दिखाएगा। अगर किसी कंपनी के पास अलग-अलग एजेंसियों से कई रेटिंग्स हैं, तो मीटर सबसे खराब (Lowest) रेटिंग को ही दिखाएगा ताकि निवेशक 'वर्स्ट-केस' जोखिम को समझ सकें। AAA रेटिंग वाले इंस्ट्रूमेंट्स सबसे सुरक्षित होंगे, जबकि B या उससे नीचे की रेटिंग डिफॉल्ट का उच्च जोखिम दिखाएगी।
प्लेटफॉर्म्स की नई जिम्मेदारी
ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रोवाइडर्स (OBPPs) को अपनी सभी लिस्टिंग पेजों पर 'Buy' बटन से पहले इसे प्रदर्शित करना होगा। किसी भी रेटिंग बदलाव के 24 घंटे के भीतर इसे अपडेट करना अनिवार्य है। इसके अलावा, अनसिक्योर्ड डेट को बोल्ड रेड टेक्स्ट में दिखाया जाएगा।
परपेचुअल बॉन्ड्स और एडिशनल टियर-1 (AT1) बॉन्ड्स जैसे जटिल प्रोडक्ट्स के लिए अब विशेष डिस्क्लेमर्स (Disclaimers) जोड़ना जरूरी है, जो कैपिटल लॉस की चेतावनी देते हैं। साथ ही, 'Issuer Not Cooperating' वाले इश्यूर्स के लिए एक 'ग्रे जोन' बनाया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे। निवेशकों को सलाह है कि वे निवेश से पहले इस मीटर की जांच जरूर करें, क्योंकि रेटिंग में बदलाव का असर सीधे आपके पोर्टफोलियो पर पड़ सकता है।
