SEBI (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने शेयर बाजार में हेरफेर का पर्दाफाश करते हुए दो कंपनियों, Copthall Mauritius Investment Limited और Mansi Share and Stock Broking Private Limited से कथित तौर पर **₹3.68 करोड़** की गलत कमाई जब्त करने का आदेश दिया है। यह मामला Sensex के क्लोजिंग प्राइस में हेरफेर से जुड़ा है।
Sensex क्लोजिंग में कैसे हुआ खेल?
SEBI की जांच में पता चला है कि 13 अगस्त 2026 को, क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान, जब इंडेक्स की क्लोजिंग प्राइस तय हो रही थी, इन दोनों कंपनियों ने असामान्य गतिविधियां कीं। दोपहर 3:20 बजे से 3:30 बजे के बीच Sensex के इंडिकेटिव इक्विलिब्रियम प्राइस (IEP) में तीन बार तेज और बड़े उतार-चढ़ाव देखे गए। SEBI ने पाया कि उस दिन Sensex 78,080 पर बंद हुआ, जो Nifty 50 के प्रदर्शन के मुकाबले कहीं ज्यादा था।
हेरफेर की दो चालें?
SEBI के अंतरिम आदेश के अनुसार, दोनों कंपनियों ने अलग-अलग तरीके अपनाए:
- Copthall Mauritius: कंपनी ने रेफरेंस प्राइस से 3% ऊपर कीlimit पर बड़ी मात्रा में बाय ऑर्डर (Buy Orders) लगाए। इनमें से कई ऑर्डर प्राइस मूवमेंट के तुरंत बाद रद्द कर दिए गए, जिससे इंडेक्स को ऊपर धकेलने की कोशिश का शक हुआ। चूंकि Copthall के पास कॉल ऑप्शन (Call Options) और पुट ऑप्शन (Put Options) थे, इसलिए क्लोजिंग प्राइस बढ़ने से उसके निवेश का मूल्य बढ़ता।
- Mansi Share and Stock Broking: दूसरी ओर, Mansi ने रेफरेंस प्राइस से काफी नीचे बड़े सेल ऑर्डर (Sell Orders) दिए, जिससे इंडेक्स का मूल्य कुछ मिनटों के लिए दबा रहा, और फिर इन ऑर्डर्स को भी रद्द कर दिया गया। यह कदम कंपनी के पोर्टफोलियो के लिए फायदेमंद लग रहा था, जिसमें ऐसे पुट ऑप्शन थे जो इंडेक्स गिरने पर मुनाफा देते हैं।
SEBI ने साफ किया है कि दोनों कंपनियों का तरीका भले ही अलग था, लेकिन उनका मकसद अपने डेरिवेटिव दांव (Derivative Bets) को फायदा पहुंचाने के लिए इंडेक्स को प्रभावित करना था।
बाजार की ईमानदारी पर SEBI का पहरा
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर एक गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि यह सीधे फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स (Futures and Options Contracts) के सेटलमेंट प्राइस को प्रभावित करता है। रिटेल निवेशकों सहित ट्रेडर्स, एक्सपायरी (Expiry) वाले दिन अपने मुनाफे या नुकसान का पता लगाने के लिए इस क्लोजिंग प्राइस पर निर्भर करते हैं। ऐसे में कृत्रिम प्राइस मूवमेंट बाजार की निष्पक्षता को कमजोर करते हैं।
इस मामले के सामने आने के बाद, SEBI ने दोनों फर्मों को सिक्योरिटीज मार्केट (Securities Market) से प्रतिबंधित कर दिया है और जब तक पूरी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक उन्हें क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में भाग लेने की इजाजत नहीं होगी। SEBI ने उनकी बैंक और डीमैट खातों को भी फ्रीज कर दिया है ताकि किसी भी गलत कमाई की रिकवरी संभव हो सके। यह दिखाता है कि SEBI नए मार्केट मैकेनिज्म (Market Mechanisms) पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है।
