SEBI ने आज से ETF (Exchange Traded Funds) के लिए नई ट्रेडिंग गाइडलाइन्स लागू कर दी हैं। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य मार्केट स्टेबिलिटी और लिक्विडिटी को बेहतर बनाना है, जिसके लिए प्राइस डिस्कवरी और सेटलमेंट के तरीकों में बड़े बदलाव किए गए हैं।
ETF ट्रेडिंग के लिए एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। इन नियमों को 7 सितंबर, 2026 से प्रभावी कर दिया गया है। शुरुआत में इन्हें 1 सितंबर से लागू किया जाना था, लेकिन स्टॉक एक्सचेंजों को तकनीकी तैयारी और मॉक सेशन के लिए 1 हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया था।
क्या बदलेगा निवेशकों के लिए?
इस नए ढांचे में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 'प्री-ओपन कॉल ऑक्शन' का है। अब मार्केट खुलने से ठीक पहले एक छोटी विंडो में बाय और सेल ऑर्डर को इकट्ठा किया जाएगा, जिससे मार्केट खुलते ही होने वाली भारी उतार-चढ़ाव (Volatility) को कम किया जा सकेगा। इसके अलावा, SEBI ने अब ETF के लिए 'डायनेमिक प्राइस बैंड' अनिवार्य कर दिए हैं। ये बैंड इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि ETF की मार्केट प्राइस उसके अंडरलाइंग NAV (Net Asset Value) के करीब बनी रहे, जिससे निवेशकों को गलत भाव पर खरीदारी न करनी पड़े।
सेटलमेंट और सुरक्षा
रेगुलेटर ने सेटलमेंट फेल्योर से निपटने के लिए भी कड़े और मानकीकृत (Standardized) क्लोज-आउट प्रोसीजर तैयार किए हैं। इससे ट्रेडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिटेल से लेकर इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स तक को फायदा होगा। ये नियम अब NSE और BSE समेत सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म्स पर लागू हैं, चाहे वह इक्विटी हो, डेट हो, गोल्ड हो या सिल्वर ETF।
