SEBI द्वारा दी गई वह राहत अब खत्म हो चुकी है जिसके तहत कंपनियां अपने IPO के फ्रेश इश्यू साइज में **50%** तक का बदलाव बिना नए ड्राफ्ट फाइल किए कर सकती थीं। **30 सितंबर, 2026** से पुरानी व्यवस्था लागू हो गई है।
बाजार में लिस्टिंग की तैयारी कर रही कंपनियों के लिए अब पुराने सख्त नियम वापस आ गए हैं। SEBI ने वह अस्थायी राहत वापस ले ली है, जिसके जरिए कंपनियां बाजार की अस्थिरता को देखते हुए अपने फ्रेश इश्यू के साइज को 50% तक एडजस्ट कर सकती थीं। यह सुविधा 30 सितंबर, 2026 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो गई है।
अब क्या होगा नियम?
स्टैंडर्ड रेगुलेटरी प्रोटोकॉल के मुताबिक, अगर कोई कंपनी अपने फ्रेश इश्यू साइज में 20% से अधिक का बदलाव करना चाहती है, तो उसे अनिवार्य रूप से अपने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) को फिर से फाइल करना होगा। यह कदम मार्केट ट्रांसपेरेंसी बनाए रखने और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
पहले यह छूट इसलिए दी गई थी ताकि भू-राजनीतिक तनाव जैसी स्थितियों में कंपनियां अपने फंडिंग प्लान को बिना पूरी प्रक्रिया को दोबारा शुरू किए बदल सकें। लेकिन अब, कंपनियों और बुक-रनिंग लीड मैनेजर्स को फंड जुटाने के लक्ष्यों को लेकर अधिक सतर्क रहना होगा।
यह बदलाव निवेशकों के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि इससे डिस्क्लोजर नॉर्म्स में पारदर्शिता बनी रहेगी। जब कंपनियां अपने फंड-रेजिंग प्लान बदलती हैं, तो दोबारा फाइलिंग करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि नई पूंजी का इस्तेमाल कैसे होगा। इससे इक्विटी डाइल्यूशन या वैल्यूएशन से जुड़ी किसी भी अनिश्चितता को कम करने में मदद मिलेगी। जो कंपनियां अब अपना IPO लाने की तैयारी कर रही हैं, उन्हें अपने फाइनेंशियल प्रोजेक्शंस और इश्यू साइज की प्लानिंग पहले से ही बेहद सटीक रखनी होगी, क्योंकि अब उनके पास 'क्विक एडजस्टमेंट' का कोई बफर मौजूद नहीं है।
