SEBI का यू-टर्न! F&O में नए सुधारों पर ब्रेक, 'इंतजार करो और देखो' पर फोकस, जानें क्या है वजह?

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का यू-टर्न! F&O में नए सुधारों पर ब्रेक, 'इंतजार करो और देखो' पर फोकस, जानें क्या है वजह?
Overview

SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट में नए सुधारों को फिलहाल रोक दिया गया है। SEBI अब 'इंतजार करो और देखो' (wait and watch) की रणनीति अपनाएगा, जिसका मुख्य मकसद हाल ही में लागू किए गए जोखिम प्रबंधन उपायों (risk management measures) के असर का जायजा लेना और यह समझना है कि कहीं शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस का बढ़ता इस्तेमाल सट्टेबाजी के लिए तो नहीं हो रहा।

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SEBI की यह 'Wait and Watch' रणनीति इस बात का संकेत है कि रेगुलेटर शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस के बढ़ते चलन से चिंतित है। उन्हें लगता है कि यह कहीं न कहीं सट्टेबाजी (speculation) को बढ़ावा दे रहा है और हेजिंग (hedging) व प्राइस डिस्कवरी (price discovery) जैसे असली आर्थिक उद्देश्यों से भटक रहा है। इस फैसले से यह पता चलेगा कि हालिया उपायों ने वाकई में अत्यधिक सट्टेबाजी को कम किया है या सिर्फ मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए मुश्किलें बढ़ाई हैं।

डेरिवेटिव एक्टिविटी पर पैनी नजर

भारत के F&O मार्केट में लगातार ऊंचे वॉल्यूम, खासकर इंडेक्स ऑप्शंस में, रिटेल निवेशकों की बड़ी भागीदारी के बीच SEBI का यह सतर्क रुख सामने आया है। 'Wait and watch' की रणनीति का मतलब है कि SEBI उन जोखिम प्रबंधन टूल्स (risk management tools) पर बारीकी से नजर रखेगा जो दिसंबर 2025 की शुरुआत में लागू किए गए थे। इनमें इंडेक्स डेरिवेटिव लिमिट्स के लिए एक दिन की ग्रेस पीरियड (grace period) को हटाना, फ्यूचर्स के लिए प्री-ओपन सेशन (pre-open session) लाना और मार्केट-वाइड पोजीशन लिमिट (MWPL) की रियल-टाइम निगरानी जैसे कड़े कदम शामिल थे। इनका मकसद सट्टेबाजी की अत्यधिक गतिविधि (speculative hyperactivity) को कंट्रोल करना था।

वैश्विक संकेत और ऐतिहासिक संदर्भ

SEBI का यह तरीका डेरिवेटिव्स में रिटेल ट्रेडिंग की विस्फोटक वृद्धि से जूझ रहे दुनिया भर के रेगुलेटर्स की सोच से मिलता-जुलता है। हालांकि, शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस के "आर्थिक उद्देश्य" पर SEBI का खास ध्यान इसे थोड़ा अलग बनाता है। इतिहास गवाह है कि रेगुलेटरी ठहराव (regulatory pause) के बाद अक्सर मार्केट पार्टिसिपेंट्स अपनी रणनीतियों को बदलते हैं, लेकिन अगर यह कदम किसी बड़े खतरे को दूर करने में देरी के रूप में देखा गया तो इसकी आलोचना भी हो सकती है। SEBI के सामने चुनौती यह है कि वह सिस्टमैटिक जोखिमों (systemic risks) को कम करने के लिए पर्याप्त नियंत्रण लगाए, लेकिन डेरिवेटिव्स मार्केट के वैध प्राइस डिस्कवरी और हेजिंग कार्यों को बाधित न करे।

जोखिम और आगे की राह

SEBI द्वारा लंबे समय तक 'इंतजार करो और देखो' की रणनीति अपनाने में जोखिम भी हैं। मुख्य चिंता यह है कि अगर बाजार के अंतर्निहित गतिशीलता (underlying market dynamics) में मौलिक बदलाव नहीं आया है, तो रेगुलेटरी ढील (regulatory forbearance) से सट्टेबाजी, खासकर शॉर्ट-डेटेड ऑप्शंस में, बिना किसी रोक-टोक के फिर से बढ़ सकती है। हालांकि SEBI का इरादा डेटा इकट्ठा करना है, लेकिन बाजार इसे निर्णायक कार्रवाई की कमी के रूप में देख सकता है, जिससे जोखिम लेने वाले व्यवहार को बढ़ावा मिल सकता है।

एनालिस्ट्स की राय

मार्केट एनालिस्ट्स SEBI के रुख को मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जहां एक ओर डेटा-संचालित नीति (data-driven policy) के प्रति रेगुलेटर की प्रतिबद्धता की सराहना की जा रही है, वहीं कुछ को चिंता है कि अगर सट्टेबाजी बढ़ती है तो यह लंबा ठहराव जरूरी स्ट्रक्चरल सुधारों में देरी कर सकता है। ब्रोकरेज हाउसेज SEBI के संकेतों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.