SEBI का बड़ा ऐलान: डेरिवेटिव्स पर नई पाबंदियों के बजाय मार्केट ग्रोथ पर रहेगा फोकस

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का बड़ा ऐलान: डेरिवेटिव्स पर नई पाबंदियों के बजाय मार्केट ग्रोथ पर रहेगा फोकस

SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने साफ कर दिया है कि रेगुलेटर अब डेरिवेटिव्स सेगमेंट में नई सख्ती के बजाय मार्केट के विकास पर जोर देगा। वित्त वर्ष 2026 में रिटेल ट्रेडर्स को **₹91,685 करोड़** का नुकसान होने के बावजूद, SEBI का मकसद सट्टेबाजी कम करने के लिए लॉन्ग-डेटेड इंस्ट्रूमेंट्स को बढ़ावा देना है।

मार्केट ग्रोथ पर रेगुलेटर का जोर

SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया है कि मार्केट की लिक्विडिटी और गहराई बनाए रखना रेगुलेटर की प्राथमिकता है। हालांकि, फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में रिटेल ट्रेडर्स को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, फिर भी अब रेगुलेटर नए सख्त नियम थोपने के बजाय मार्केट को विकसित करने की रणनीति पर काम कर रहा है।

रिटेल निवेशकों के सामने बड़ी चुनौती

आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2026 में करीब 87.7% रिटेल ट्रेडर्स को नेट लॉस हुआ है, जो कुल ₹91,685 करोड़ तक पहुंच गया है। वहीं, वित्त वर्ष 2022 से 2026 के बीच कुल नुकसान का आंकड़ा ₹3.85 लाख करोड़ के पार निकल चुका है। इस रिस्क को कम करने के लिए SEBI अब निवेशकों को लॉन्ग-डेटेड स्टॉक फ्यूचर्स और ऑप्शंस की तरफ शिफ्ट करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है, ताकि छोटी अवधि की सट्टेबाजी को कम किया जा सके।

फाइनेंशियल सिस्टम की मजबूती पर नजर

डिराइवेटिव्स से इतर, रेगुलेटर का ध्यान देश की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने पर है। फिलहाल म्यूचुअल फंड एसेट्स ₹87 लाख करोड़ और कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट ₹61 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है। इसके अलावा, सेटलमेंट और प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाने के लिए DMAT 2.0 और टोकनाइजेशन जैसी आधुनिक तकनीकों पर जोर दिया जा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.