SEBI (Securities and Exchange Board of India) ने Trdez Investment Pvt Ltd पर ₹1 करोड़ का एक कड़ा जुर्माना लगाया है। यह एक्शन ₹2,950 करोड़ से भी बड़े एक पोंजी स्कीम में कंपनी की मिलीभगत को लेकर है। नियामक संस्था ने पाया कि Trdez Investment ने अपने स्टॉकब्रोकर लाइसेंस का इस्तेमाल एक ढाल (shield) के तौर पर किया, ताकि Infinite Beacon, IB Prop Desk, और Sispay TFS जैसी कंपनियों द्वारा चलाए जा रहे धोखाधड़ी वाले ऑपरेशन को वैधता मिल सके। ये फर्में निवेशकों से हर महीने 10-12% जैसे अवास्तविक (unsustainable) रिटर्न का वादा कर पैसा बना रही थीं।
SEBI की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि Trdez Investment खुद एक लगभग निष्क्रिय (inactive) इकाई थी। कंपनी ने अपनी जांच अवधि के दौरान केवल ₹43,430 के प्रोप्राइटरी ट्रेड किए थे और किसी भी क्लाइंट के लिए कोई भी ट्रेड नहीं किया। इससे यह साफ है कि कंपनी का मुख्य काम सिर्फ एक 'नकली' विश्वसनीयता (fake credibility) प्रदान करना था, न कि असल स्टॉकब्रोकिंग व्यवसाय चलाना।
यह मामला सीधे तौर पर बाजार के इंटरमीडियरीज (market intermediaries) पर नियामक के नियंत्रण और निवेशक संरक्षण में मौजूद गंभीर खामियों की ओर इशारा करता है। SEBI ने इस फैसले से यह साफ कर दिया है कि नियामक संस्थाओं के 'फिट एंड प्रॉपर' (fit and proper) होने के मानदंडों का उल्लंघन करने वाले किसी भी तरह के कदाचार (misconduct) को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि स्टॉक एक्सचेंजों ने पहले ही मार्च 2026 में Trdez Investment को कई डिफॉल्ट के चलते निष्कासित (expelled) कर दिया था।
इस तरह की पोंजी स्कीमें नए निवेशकों के पैसे से पुराने निवेशकों को भुगतान करती हैं, जिससे अंततः यह ढह जाती हैं और आम निवेशक अपना सारा पैसा गंवा देते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि फंड को कई लिंक की गई कंपनियों से गुजारा गया, और कथित तौर पर कुछ पैसे क्रिप्टोकरेंसी में भी डाले गए। SEBI निवेशकों को लगातार आगाह करता रहा है कि जो भी स्कीम बहुत ऊँचे और निश्चित रिटर्न का वादा करे, उससे दूर रहें, क्योंकि ये लगभग हमेशा ही धोखाधड़ी साबित होती हैं। नियामक संस्थाएं ऐसे वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए अपनी सतर्कता बढ़ा रही हैं, लेकिन निवेशकों को भी अपनी मेहनत की कमाई बचाने के लिए जागरूक रहना होगा।