बाजार नियामक SEBI ने Shares Bazaar Private Limited पर ₹20 लाख का भारी जुर्माना लगाया है। कंपनी पर बिना किसी अनुमति के 'अश्योर्ड रिटर्न' (Assured-return) स्कीम चलाने और निवेशकों का पैसा बाजार में लगाने के बजाय उसे दूसरी कंपनियों में डायवर्ट करने का आरोप है।
अवैध स्कीम का काला चिट्ठा
बाजार नियामक SEBI ने Shares Bazaar Private Limited (SBPL) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन पर और उनकी मैनेजमेंट टीम पर कुल ₹20 लाख का जुर्माना ठोका है। यह एक्शन मार्च 2021 से दिसंबर 2022 के बीच चली गतिविधियों की जांच के बाद लिया गया है। इस पूरी धांधली की शुरुआत जुलाई 2022 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा रेफरेंस भेजे जाने के बाद हुई थी।
कैसे दिया झांसा?
कंपनी ने 'Making Millions Financially Free' के नाम से एक प्रोग्राम चलाया, जिसमें निवेशकों को सालाना 18% से 48% तक का रिटर्न देने का लालच दिया गया। निवेशकों को यह विश्वास दिलाया गया कि उनका पैसा वैध मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में लगाया जा रहा है। हालांकि, जांच में कुछ और ही निकला।
पैसे का गलत इस्तेमाल
SEBI की जांच में सामने आया कि कंपनी के पास लगभग ₹72.66 करोड़ आए, जिसमें से ₹72.41 करोड़ बाहर भेज दिए गए। यह पैसा शेयर बाजार में लगाने के बजाय 'Kisaan Parivar Private Limited' जैसी संबंधित संस्थाओं को डायवर्ट कर दिया गया या फिर पुराने निवेशकों को पैसा लौटाने में इस्तेमाल किया गया। ट्रांजेक्शन को छिपाने के लिए बैंक रिकॉर्ड में 'PMS', 'डिविडेंड' या 'रेफरल' जैसे शब्द इस्तेमाल किए गए थे।
मैनेजमेंट पर भी नकेल
जुर्माने की तलवार केवल कंपनी पर ही नहीं, बल्कि उनके प्रमुख लोगों पर भी गिरी है:
- Shares Bazaar Private Limited: ₹10 लाख का जुर्माना
- Bhupal Nanavath, Tirumala Lakshmi Venkata Ramesh, और Prasanna Lakshmi Atlur: हर एक पर ₹3 लाख का जुर्माना
- CEO Naresh Mitta: ₹1 लाख का जुर्माना
निवेशकों के लिए सबक: अगर कोई भी स्कीम आपको बाजार में 'गारंटीड फिक्स्ड रिटर्न' का वादा करती है, तो वह सबसे बड़ा रेड फ्लैग है। इक्विटी मार्केट में जोखिम हमेशा बना रहता है। किसी भी एडवाइजर के पास निवेश करने से पहले SEBI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर उनका रजिस्ट्रेशन स्टेटस जरूर चेक करें।
