भारतीय प्राइमरी मार्केट में तेजी का दौर जारी है। SEBI के अनुमान के मुताबिक, FY27 तक IPO के जरिए फंड जुटाने का आंकड़ा **₹2 लाख करोड़** तक पहुंच सकता है। इस साल अब तक **₹60,000 करोड़** जुटाए जा चुके हैं, जो बाजार की गहराई को दर्शाता है।
ताजा बदलाव और आंकड़े
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने साफ संकेत दिए हैं कि भारतीय कंपनियां अब फंड जुटाने के लिए प्राइमरी मार्केट को अपना मुख्य जरिया बना रही हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस साल जुटाए गए कुल फंड का 55% हिस्सा 'फ्रेश कैपिटल' (Fresh Capital) है। इसका सीधा मतलब है कि यह पैसा कंपनियों के बैंक अकाउंट में जाएगा, जिससे नए कारखाने लगेंगे और बिजनेस का विस्तार होगा, न कि सिर्फ पुराने प्रमोटर्स अपना हिस्सा बेचकर निकलेंगे।
इकोसिस्टम में आया बड़ा बदलाव
भारत का फाइनेंशियल सिस्टम तेजी से परिपक्व हो रहा है। 2016 में जो कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट ₹20 लाख करोड़ का था, वह आज बढ़कर ₹61 लाख करोड़ हो चुका है। वहीं, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM (Assets Under Management) पिछले पांच सालों में तीन गुना होकर ₹87 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आज देश में 14.9 करोड़ यूनिक निवेशक हैं और SIP का योगदान कुल एसेट्स में 20% से ज्यादा हो गया है।
सुधारों की रफ्तार
रेगुलेटर का फोकस अब रेड-टेप कम करने पर है। Foreign Portfolio Investors (FPIs) के लिए SWAGAT-FI फ्रेमवर्क लाया गया है, जिसका लाभ 200 से ज्यादा विदेशी संस्थान ले रहे हैं। इसके अलावा, Demat 2.0 जैसे तकनीकी सुधारों से बॉन्ड सेटलमेंट में पारदर्शिता बढ़ाई जा रही है।
निवेशकों के लिए सावधानी
इतनी तेजी के बीच, निवेशकों को 'IPO हाइप' से बचना चाहिए। कई बार बाजार की चमक-धमक में कंपनियां बहुत महंगे वैल्यूएशन पर आती हैं। पैसा लगाने से पहले बिजनेस की क्वालिटी, कर्ज का स्तर और प्रॉफिट मार्जिन की सस्टेनेबिलिटी को जरूर चेक करें।
