SEBI अब डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में नए सुरक्षा उपाय लाने की तैयारी कर रही है, ताकि एक्सपायरी के दिन बाजार में होने वाली भारी उथल-पुथल (Volatility) को नियंत्रित किया जा सके। होल-टाइम मेंबर केवीआर मूर्ति ने साफ किया है कि लक्ष्य लिक्विडिटी और निवेशकों की सुरक्षा के बीच सही तालमेल बिठाना है।
बाजार की सुरक्षा पर जोर
SEBI अब डेरिवेटिव्स सेगमेंट में सख्ती और लचीलेपन का मिश्रण अपनाने की दिशा में बढ़ रही है। एक्सपायरी के दिन जिस तरह से ट्रेडिंग वॉल्यूम और उतार-चढ़ाव बढ़ते हैं, उसे देखते हुए रेगुलेटर अब नए 'सेफगार्ड्स' (Safeguards) पर काम कर रहा है। केवीआर मूर्ति का कहना है कि हमारा मुख्य उद्देश्य मार्केट को स्टेबल रखना है, ताकि रिटेल निवेशकों का भरोसा बरकरार रहे और लिक्विडिटी पर कोई बुरा असर न पड़े।
AI का सहारा और नई कार्यप्रणाली
बाजार की निगरानी के लिए SEBI ने अब खुद के Artificial Intelligence टूल्स तैनात किए हैं, जो रियल-टाइम में जटिल ट्रेडिंग पैटर्न को ट्रैक करते हैं। हालांकि, रेगुलेटर ने स्पष्ट किया है कि अंत में फैसले लेने का अधिकार इंसानी हाथों में ही रहेगा। इसके अलावा, ग्लोबल लेवल पर क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उभरते जोखिमों से निपटने के लिए SEBI विदेशी रेगुलेटर्स के साथ मिलकर काम कर रहा है।
क्या बदल रहा है?
- डेटा-ड्रिवन अप्रोच: अब पुरानी और कठोर नीतियों की जगह डेटा और ब्रोकर फीडबैक पर आधारित नीतियां बन रही हैं।
- सख्त vs नरम: छोटी प्रशासनिक गलतियों के लिए केवल सलाह दी जा रही है, लेकिन बाजार की अखंडता से खिलवाड़ करने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
- बड़ा रिफॉर्म: फिलहाल SEBI LODR और ICDR के नियमों की समीक्षा कर रही है, जिससे कॉर्पोरेट गवर्नेंस और मजबूत होगा।
आने वाले दिनों में डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग नॉर्म्स को लेकर जो नए सर्कुलर आएंगे, उन पर निवेशकों को नजर रखनी होगी, क्योंकि इनका असर सीधे आपके ट्रेडिंग बिहेवियर और रिस्क मैनेजमेंट पर पड़ेगा।
