SEBI के बड़े दांव: डेरिवेटिव्स की अवधि बढ़ेगी? राजेश एक्सपोर्ट्स पर धोखाधड़ी का शक!

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI के बड़े दांव: डेरिवेटिव्स की अवधि बढ़ेगी? राजेश एक्सपोर्ट्स पर धोखाधड़ी का शक!

भारतीय शेयर बाज़ार नियामक SEBI निवेशकों के लिए डेरिवेटिव्स (Derivatives) के नए नियम लाने की तैयारी में है। साथ ही, SEBI अब राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) पर रेवेन्यू गलत बताने और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोपों की जांच कर रहा है।

डेरिवेटिव्स में बड़े बदलाव की तैयारी

सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) जल्द ही डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए लंबी एक्सपायरी डेट (Expiration Date) लाने की संभावनाओं पर गौर कर रहा है। फिलहाल, भारत में ज्यादातर डेरिवेटिव्स की एक्सपायरी वीकली या मंथली होती है। SEBI के चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि लंबी अवधि के प्रोडक्ट पेश करने में आने वाली चुनौतियों और बाधाओं पर चर्चा की जाएगी। इसका मुख्य मकसद निवेशकों को लॉन्ग-टर्म हेजिंग (Hedging) के लिए बेहतर विकल्प देना है। SEBI जुलाई में भारतीय बाज़ार में डेरिवेटिव्स के प्रभाव पर एक स्टडी (Study) जारी करेगा, जिसके बाद संभव है कि ये नए प्रोडक्ट लॉन्च किए जाएं।

राजेश एक्सपोर्ट्स पर जांच का शिकंजा

दूसरी ओर, SEBI राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ भी जांच कर रहा है। कंपनी पर रेवेन्यू गलत तरीके से दिखाने और कॉर्पोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगे हैं। ये आरोप करीब दो साल पहले एक शेयरहोल्डर (Shareholder) ने लगाए थे। आरोपों के मुताबिक, कंपनी ने पिछले पांच सालों में अपने रेवेन्यू को गलत तरीके से पेश किया हो सकता है, जिसका आंकड़ा ₹15 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है। इस जांच में कंपनी के बिजनेस एक्टिविटीज (Business Activities) और अफ्रीका में गोल्ड माइंस (Gold Mines) में किए गए निवेशों के खुलासे भी शामिल हैं।

गवर्नेंस पर सवाल

राजेश एक्सपोर्ट्स की कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं। खास तौर पर, कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (Chairman and Managing Director) का कंपनी की ऑडिट कमेटी (Audit Committee) में शामिल होना एक बड़ा सवाल है। ऑडिट कमेटी का काम वित्तीय रिपोर्टिंग की स्वतंत्र निगरानी करना होता है। जब कंपनी का प्रमुख ही इस कमेटी का हिस्सा होता है, तो हितों के टकराव (Conflict of Interest) का मामला बन सकता है। SEBI अपनी जांच के तरीकों को और बेहतर बना रहा है ताकि ऐसी समस्याओं का जल्दी पता लगाया जा सके। नियामक संस्था ने यह भी स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक बयान देने से पहले कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है।

निवेशकों के लिए क्या है खास?

डेरिवेटिव्स मार्केट में रुचि रखने वाले निवेशकों के लिए SEBI की जुलाई में आने वाली स्टडी काफी अहम होगी। वहीं, राजेश एक्सपोर्ट्स के मामले में, रेवेन्यू और गवर्नेंस से जुड़े आरोपों पर SEBI की जांच के नतीजे निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। लिस्टेड कंपनियों में पारदर्शिता और ऑडिट फंक्शन की स्वतंत्रता शेयरहोल्डर के भरोसे को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है।

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