SEBI ने कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए IPO से जुड़े एक अहम नियम की समयसीमा बढ़ा दी है। अब कंपनियां बिना नया ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट फाइल किए अपने फ्रेश इश्यू साइज में **50%** तक बदलाव कर सकेंगी, जो **31 मार्च, 2027** तक प्रभावी रहेगा।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कंपनियों को राहत
SEBI ने अपनी हालिया गाइडलाइन्स में स्पष्ट किया है कि कंपनियों को अब फंड जुटाने की प्रक्रिया में ज्यादा लचीलापन (flexibility) मिलेगा। 12 अक्टूबर, 2026 को Association of Investment Bankers of India (AIBI) को भेजे गए निर्देश में रेगुलेटर ने कहा है कि अब कंपनियों को नया ड्राफ्ट ऑफर डॉक्यूमेंट फाइल करने की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी। यह नियम उन सभी IPOs पर लागू होगा जो 31 मार्च, 2027 तक ओपन होंगे।
क्यों लिया गया यह फैसला?
यह कदम मुख्य रूप से अप्रैल 2026 में बाजार की अस्थिरता और जियोपॉलिटिकल तनावों को देखते हुए शुरू किया गया था। पहले, यदि कोई कंपनी अपने फ्रेश इश्यू में 20% से ज्यादा का बदलाव करना चाहती थी, तो उसे पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ती थी, जिससे लिस्टिंग में देरी होती थी और लागत भी बढ़ जाती थी।
निवेशकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
हालांकि यह नियम कंपनियों के लिए आसान है, लेकिन इसमें पारदर्शिता (transparency) की शर्त अनिवार्य है। यदि कंपनी अपना इश्यू साइज बदलती है, तो उसे एक 'ऐडेंडम' (Addendum) के जरिए निवेशकों को इसकी जानकारी देनी होगी। लीड मैनेजर्स को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि बदलाव कंपनी के फंड के इस्तेमाल के मुख्य उद्देश्यों के साथ खिलवाड़ न करे। निवेशकों के लिए यह सलाह है कि वे किसी भी बड़े बदलाव के समय जारी किए गए उस 'ऐडेंडम' को जरूर पढ़ें, ताकि वे समझ सकें कि इश्यू साइज में यह बदलाव कंपनी की ग्रोथ स्ट्रेटजी में किस तरह के संकेत दे रहा है।
