SEBI ने Waaree Energies के प्रमोटर CT Doshi Family Trust को कंपनी में **44.88%** हिस्सेदारी बिना ओपन ऑफर के खरीदने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला प्रमोटर Chimanlal Tribhuvandas Doshi की इंटरनल सक्सेशन प्लानिंग का हिस्सा है। रेगुलेटर का कहना है कि इससे कंपनी के कंट्रोल या पब्लिक शेयरहोल्डिंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
क्या हुआ?
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने Waaree Energies Limited में CT Doshi Family Trust की हिस्सेदारी के अधिग्रहण को लेकर एक महत्वपूर्ण नियामक छूट दी है। सामान्य टेकओवर नियमों के तहत, 25% से अधिक हिस्सेदारी खरीदने पर एक अनिवार्य ओपन ऑफर लाना पड़ता है, जिसमें खरीदार को पब्लिक शेयरधारकों से शेयर खरीदने का प्रस्ताव देना होता है। लेकिन, SEBI ने इस आवश्यकता को माफ कर दिया है, जिससे ट्रस्ट प्रमोटर Chimanlal Tribhuvandas Doshi से सीधे इंटरनल शेयर ट्रांसफर कर सकेगा।
सक्सेशन प्लानिंग को समझें
इस ट्रांसफर के तहत, फैमिली ट्रस्ट सीधे 44.88% हिस्सेदारी खरीदेगा, और Waaree Sustainable Finance Pvt. Ltd. के माध्यम से 18.34% अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी भी अधिग्रहित करेगा। SEBI ने इस ट्रांसफर को मंजूरी दी क्योंकि यह विशुद्ध रूप से पारिवारिक उत्तराधिकार और गवर्नेंस के उद्देश्य से किया जा रहा है। रेगुलेटर ने जोर देकर कहा कि ट्रांसफर के बाद प्रमोटर ग्रुप की कुल 64.22% हिस्सेदारी अपरिवर्तित रहेगी, और कंपनी के मैनेजमेंट या ऑपरेशनल कंट्रोल में कोई बदलाव नहीं होगा। ट्रस्ट के लाभार्थी केवल परिवार के सदस्य ही होंगे।
SEBI ने छूट क्यों दी?
SEBI के नियमों के अनुसार, ऐसे छूट के लिए प्रमोटर को कम से कम तीन साल से सार्वजनिक रूप से घोषित होना चाहिए। चूंकि Waaree Energies अक्टूबर 2024 में ही स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुई थी, यह तीन साल की समय-सीमा पूरी नहीं कर पा रही थी। हालांकि, रेगुलेटर के टेकओवर पैनल ने इस छूट की सिफारिश की, क्योंकि प्रमोटर 2021 के कंपनी के ड्राफ्ट फाइलिंग में ही पहचाने गए थे। SEBI ने इस तर्क को स्वीकार किया और कहा कि डिस्क्लोजर की मूल भावना पूरी हुई है। 91 वर्षीय प्रमोटर Chimanlal Doshi की उम्र को भी इस फैसले में ध्यान में रखा गया।
निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?
शेयरधारकों के लिए, यह फैसला प्रमोटर ग्रुप की लंबी अवधि की सक्सेशन प्लानिंग पर स्पष्टता लाता है। चूंकि यह छूट केवल इंटरनल ट्रांसफर के लिए है और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर या प्रमोटरों की कुल हिस्सेदारी को नहीं बदलती है, इसलिए कंपनी के दिन-प्रतिदिन के कामकाज पर इसका सीधा असर पड़ने की संभावना नहीं है। यह छूट एक साल के लिए वैध है, जिसके दौरान ट्रस्ट को अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी करनी होगी और रेगुलेटर को एक पोस्ट-एक्विजिशन रिपोर्ट जमा करनी होगी। निवेशक इसे एक न्यूट्रल गवर्नेंस अपडेट के रूप में देख सकते हैं जो प्रमोटर परिवार के भीतर स्वामित्व संरचना को स्थिर करता है।
