SEBI का बड़ा फैसला: REITs और InvITs के नियमों में ढील, विदेशी निवेश का रास्ता हुआ आसान

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: REITs और InvITs के नियमों में ढील, विदेशी निवेश का रास्ता हुआ आसान

SEBI ने REITs और InvITs के कामकाज को आसान बनाने के लिए नए नियमों का ऐलान किया है। अब ये ट्रस्ट इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) के जरिए Depository Receipts (DRs) जारी कर सकेंगे, जिससे विदेशी पूंजी जुटाना आसान होगा।

विदेशी निवेश के लिए नई राह

SEBI ने REITs और InvITs को अब इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (IFSC) के माध्यम से Depository Receipts (DRs) जारी करने की मंजूरी दे दी है। इस कदम से विदेशी निवेशकों और NRI निवेशकों के लिए भारतीय रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में पैसा लगाना और भी सरल हो जाएगा।

वोटिंग के नियमों में बड़ा बदलाव

अब तक किसी प्रस्ताव को पास कराने के लिए कुल यूनिट्स का 75% वोट फेवर में होना जरूरी था, जिससे अक्सर गतिरोध पैदा हो जाता था। SEBI ने इसे बदलकर अब 'कुल डाले गए वोटों का 75%' कर दिया है। यह फैसला काम को तो आसान बनाएगा, लेकिन रिटेल निवेशकों को अब वोटिंग के दौरान ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि प्रस्ताव पास होना अब आसान हो गया है।

स्पॉन्सर एग्जिट हुआ सरल

स्पॉन्सर के एग्जिट प्रोसेस में भी राहत दी गई है। अब एग्जिट ऑफर की जिम्मेदारी केवल अकेले स्पॉन्सर पर नहीं, बल्कि उसके ग्रुप एंटिटीज या बाकी बचे स्पॉन्सर्स के साथ साझा की जा सकेगी। साथ ही, अगर एग्जिट के कारण पब्लिक होल्डिंग कम होती है, तो कंपनी को उसे दोबारा सही स्तर पर लाने के लिए 1 साल का ग्रेस पीरियड मिलेगा।

निवेशकों पर क्या होगा असर?

यह बदलाव लंबे समय में लिक्विडिटी बढ़ाने और ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के करीब पहुंचने के लिए है। हालांकि, स्पॉन्सर्स और माइनॉरिटी यूनिट होल्डर्स के बीच पावर का तालमेल थोड़ा बदलने की उम्मीद है। निवेशकों को सलाह है कि वे आगामी AGMs में नजर रखें कि कंपनियां इन नए नियमों का इस्तेमाल कैसे करती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.