SEBI का बड़ा फैसला: प्राइवेट डेट मार्केट के नियमों में दी ढील, 17 हुई ISIN की लिमिट

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AuthorAditya Rao|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: प्राइवेट डेट मार्केट के नियमों में दी ढील, 17 हुई ISIN की लिमिट

SEBI ने प्राइवेट डेट जुटाने वाली कंपनियों के लिए नियमों को आसान बना दिया है। अब ₹10,000 के छोटे कर्ज के लिए मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है और मैच्योरिटी लिमिट को 14 से बढ़ाकर 17 कर दिया गया है।

सेबी (SEBI) ने प्राइवेट डेट मार्केट को सुव्यवस्थित करने के लिए नए नियमों का ऐलान किया है, जो 7 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होंगे। रेगुलेटर ने मुख्य रूप से दो बड़े बदलाव किए हैं, जिससे कॉर्पोरेट उधारकर्ताओं के लिए अनुपालन (Compliance) का बोझ कम होगा।

मर्चेंट बैंकर की अनिवार्यता खत्म

अब पात्र सूचीबद्ध कंपनियां ₹10,000 के फेस वैल्यू वाले डेट को प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जुटाते समय मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने से छूट प्राप्त कर सकेंगी। हालांकि, यह राहत सभी के लिए नहीं है। इसके लिए कंपनी का RBI, IRDAI, SEBI या PFRDA जैसे किसी वित्तीय रेगुलेटर द्वारा विनियमित होना अनिवार्य है। साथ ही, कंपनी का पिछले 3 फाइनेंशियल ईयर में कोई डिफॉल्ट रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए और क्रेडिट रेटिंग कम से कम AA- होनी चाहिए।

एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट में मिलेगी राहत

रेगुलेटर ने एक फाइनेंशियल ईयर में मैच्योर होने वाले डेट ISINs की अधिकतम संख्या को 14 से बढ़ाकर 17 कर दिया है। इसमें 12 ISINs साधारण डेट के लिए और 5 ISINs स्ट्रक्चर्ड या स्पेशलाइज्ड इंस्ट्रूमेंट्स के लिए रखे गए हैं। जिन कंपनियों की आउटस्टैंडिंग मैच्योरिटी ₹15,000 करोड़ या उससे ज्यादा है, उन्हें हर अतिरिक्त ₹3,000 करोड़ के लिए एक्स्ट्रा ISIN की सुविधा भी मिलेगी। यह बैंकों और NBFCs के लिए लिक्विडिटी मैनेज करने में बेहद मददगार साबित होगा।

निवेशकों के लिए जोखिम

मर्चेंट बैंकर की छूट मिलने से थर्ड-पार्टी निगरानी कम हो सकती है, जिससे निवेशकों को अब कंपनी की साख और क्रेडिट रेटिंग पर अधिक निर्भर रहना होगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इन नियमों के बाद कंपनियों की पारदर्शिता पर निवेशकों की पैनी नजर बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.