बाजार नियामक SEBI ने निवेशकों और ब्रोकरेज फर्मों के लिए राहत का ऐलान किया है। 22 फरवरी 2027 से 'अर्ली पे-इन' (EPI) मैकेनिज्म के जरिए शेयर बेचने पर मिलने वाले पैसों को दोबारा इन्वेस्ट करने पर अतिरिक्त मार्जिन नहीं देना होगा।
नियम में क्या हुआ बदलाव?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कैश मार्केट के लिए मार्जिन नियमों को आसान बना दिया है। अब अगर कोई निवेशक अपने शेयर बेचने के बाद मिलने वाली राशि का इस्तेमाल उसी दिन दूसरे शेयर खरीदने में करता है, तो उसे 'अर्ली पे-इन' (EPI) मैकेनिज्म के तहत अतिरिक्त अपफ्रंट मार्जिन देने की जरूरत नहीं होगी। यह बदलाव 22 फरवरी 2027 से प्रभावी होगा। अब तक ब्रोकरों को क्लाइंट के री-इन्वेस्टमेंट के लिए अपनी जेब से ट्रेड वैल्यू का 20% तक मार्जिन के रूप में ब्लॉक करना पड़ता था, जिससे छोटे ब्रोकरेज हाउसों पर भारी फाइनेंशियल दबाव रहता था।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
मौजूदा व्यवस्था में, यदि कोई निवेशक शेयर बेचकर उसी पैसे से तुरंत दूसरे शेयर खरीदता है, तो क्लीयरिंग कॉरपोरेशन एक्स्ट्रा मार्जिन वसूलते थे। नए निर्देशों के मुताबिक, क्लीयरिंग कॉरपोरेशन अब सत्यापित EPI वैल्यू तक कोई अतिरिक्त मार्जिन नहीं लेंगे। हालांकि, यदि शुरुआती सेल ट्रांजैक्शन कैंसिल होता है, तो ब्रोकर को अपनी कोलेटरल (collateral) से इस कमी को पूरा करना होगा।
लिक्विडिटी पर पड़ेगा असर?
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारतीय कैश मार्केट में सुस्ती देखी जा रही है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2026 में औसत दैनिक टर्नओवर में 7% की गिरावट आई, जो घटकर ₹1.05 लाख करोड़ रह गया। वहीं, जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच कैश सेगमेंट का मार्केट कैप 6% गिर गया है। उम्मीद है कि इस नए नियम से ब्रोकरों की वर्किंग कैपिटल की समस्या कम होगी और कैश मार्केट में फिर से तेजी लौट सकती है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक असर ब्रोकरेज फर्मों द्वारा इस सिस्टम को कितनी जल्दी अपनाए जाने पर निर्भर करेगा।
