SEBI का बड़ा फैसला: Early Pay-In पर मार्जिन नियमों में मिलेगी राहत, 22 फरवरी 2027 से बदलेंगे नियम

SEBIEXCHANGE
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: Early Pay-In पर मार्जिन नियमों में मिलेगी राहत, 22 फरवरी 2027 से बदलेंगे नियम

SEBI ने निवेशकों को बड़ी राहत देते हुए Early Pay-In (EPI) से जुड़े मार्जिन नियमों में बदलाव किया है। 22 फरवरी 2027 से निवेशक उन शेयरों का इस्तेमाल मार्जिन के तौर पर कर पाएंगे जो उन्होंने पहले ही डिलीवर कर दिए हैं, जिससे ट्रेडिंग में कैपिटल एफिशिएंसी बढ़ेगी।

सेबी (SEBI) ने बाजार में ट्रेडिंग को और अधिक लचीला और प्रभावी बनाने के लिए कमर कस ली है। अब निवेशकों को अर्ली पे-इन (EPI) सुविधा के तहत मार्जिन की जटिलताओं से बड़ी राहत मिलने वाली है। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य कैश सेगमेंट में लिक्विडिटी को बेहतर करना है।

नई मार्जिन व्यवस्था कैसे काम करेगी?

अभी तक निवेशकों को नए ट्रेड के लिए अलग से कैश या एक्स्ट्रा सिक्योरिटीज़ को मार्जिन के तौर पर ब्लॉक करना पड़ता था, भले ही उन्होंने पहले ही अन्य ट्रांजेक्शन के लिए शेयर डिलीवर कर दिए हों। अब, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन रीयल-टाइम में EPI रिक्वेस्ट को वेरिफाई करेंगे। यदि कोई ट्रेडर सेटलमेंट डेडलाइन से पहले शेयर डिलीवर कर देता है, तो उस वैल्यू को मार्जिन ऑब्लिगेशन में गिना जाएगा। इसका सीधा मतलब यह है कि ट्रेडर को फ्रेश पोजीशन के लिए अतिरिक्त मार्जिन देने की जरूरत नहीं होगी, जिससे उनका कैपिटल दिनभर बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो सकेगा।

किन चीजों पर लागू नहीं होगा यह नियम?

यह फैसला रिस्क मैनेजमेंट रिव्यू कमिटी की सिफारिशों और ब्रोकर्स इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स फोरम की मांग के बाद लिया गया है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना होगा कि यह छूट सभी तरह के शेयरों पर नहीं मिलेगी। 'Trade for Trade' कैटेगरी के शेयरों में पहले की तरह ही स्टैंडर्ड ग्रॉस सेटलमेंट प्रक्रिया जारी रहेगी, वहां मार्जिन ऑफसेट की सुविधा नहीं मिलेगी।

रिस्क और सावधानियां

इस लचीलेपन के साथ एक ऑपरेशनल रिस्क भी जुड़ा है। अगर कोई ट्रेडर अपनी पोजीशन को रिवर्स करता है (जैसे कि पहले कमिट किए गए शेयरों को वापस खरीदना), तो उन शेयरों से मिलने वाला मार्जिन बफर तुरंत हट जाएगा। ऐसी स्थिति में यदि मार्जिन शॉर्टफॉल होता है, तो क्लियरिंग कॉर्पोरेशन के पास ब्रोकर्स के कोलैटरल का इस्तेमाल करने का अधिकार होगा। इसलिए, अक्सर ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों को अपनी पोजीशन और मार्जिन स्टैंडिंग पर बारीक नजर रखनी होगी ताकि सेटलमेंट में कोई रुकावट न आए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.