SEBI ने रोड सेक्टर के InvITs के लिए बड़ा नियम बदला है। अब ये इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट अपने डिस्ट्रिब्यूटेबल कैश फ्लो की गणना में, बाहरी कर्ज से किए गए बड़े मेंटेनेंस खर्चों को जोड़ सकेंगे। इससे निवेशकों को मिलने वाले डिविडेंड (Dividend) में अचानक कटौती से राहत मिलेगी।
SEBI का नया फरमान: क्या है बदल��?
सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के नेट डिस्ट्रिब्यूटेबल कैश फ्लो (NDCF) की गणना के नियमों में अहम बदलाव किया है। नए नियमों के तहत, अब रोड सेक्टर वाले InvITs, स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) और InvIT ट्रस्ट दोनों स्तरों पर, बाहरी कर्ज (Debt) से किए गए बड़े मेंटेनेंस खर्चों को अपने NDCF में जोड़ सकते हैं।
निवेशकों के लिए क्या है मतलब?
इस बदलाव का सीधा फायदा निवेशकों को डिविडेंड (Dividend) के रूप में मिल सकता है। इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर सड़कों को समय-समय पर बड़े मेंटेनेंस की जरूरत पड़ती है, जिसमें काफी खर्च आता है। पहले, जब InvITs इस खर्च को अपनी कमाई से करते थे, तो निवेशकों को मिलने वाले डिविडेंड में भारी गिरावट आती थी।
लेकिन अब, कर्ज लेकर मेंटेनेंस कराने और फिर उस खर्च को कैश फ्लो गणना में वापस जोड़ने की इजाजत मिलने से, InvITs इस बड़े खर्च के असर को लंबे समय में फैला सकेंगे। इससे InvITs अपने निवेशकों को लगातार और स्थिर डिविडेंड दे पाएंगे, और अचानक खर्चों के कारण भुगतान में भारी कटौती से बचेंगे। हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि इससे InvITs पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा। निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी का रेवेन्यू ग्रोथ इस नए कर्ज के ब्याज और डिविडेंड भुगतान को पूरा करने के लिए काफी है या नहीं।
गवर्नेंस और सुरक्षा उपाय
SEBI ने इस सुविधा के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए हैं। InvITs किसी भी तरह के मेंटेनेंस के लिए कर्ज का इस्तेमाल नहीं कर सकते। यह खर्च सिर्फ 'बड़े मेंटेनेंस' यानी नॉन-रूटीन काम के लिए होना चाहिए, जो कंसेशन एग्रीमेंट के तहत जरूरी हो।
इसके अलावा, InvITs को यह खर्च NDCF में जोड़ने से पहले कम से कम 60% निवेशकों की मंजूरी लेनी होगी। इन्वेस्टमेंट मैनेजर को प्रोजेक्ट, अनुमानित लागत और भविष्य के डिविडेंड पर पड़ने वाले असर की पूरी और विस्तृत जानकारी देनी होगी। साथ ही, एक स्टैच्यूटरी ऑडिटर (Statutory Auditor) को यह प्रमाणित करना होगा कि मेंटेनेंस का काम कंसेशन एग्रीमेंट के अनुसार है और यह बाहरी कर्ज से ही फंड किया गया है। अगर किसी भी कारण से लिया गया कर्ज, निवेशकों द्वारा मंजूर की गई रकम से ज्यादा होता है, तो दोबारा वोटिंग करानी होगी।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
यह बदलाव InvITs को ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी तो देता है, लेकिन ट्रस्ट के अंदर लीवरेज रिस्क (Leverage Risk) बढ़ जाता है। निवेशकों को अपने InvITs के डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt-to-Equity Ratio) और इंटरेस्ट कवरेज लेवल (Interest Coverage Level) पर नजर रखनी चाहिए। अगर कोई InvIT मेंटेनेंस के लिए भारी कर्ज पर निर्भर है, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी या टोल रेवेन्यू में धीमी ग्रोथ की स्थिति में दबाव का सामना कर सकता है। निवेशकों के लिए अगला महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि अलग-अलग InvITs अपनी भविष्य की रेगुलेटरी फाइलिंग और निवेशक संचार में अपने मेंटेनेंस के लिए कर्ज लेने की योजनाओं को कैसे समझाते हैं।
