SEBI InvIT Rules: इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी खबर! SEBI ने आसान किए उधार लेने के नियम, मिलेगी ज़्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी

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AuthorNeha Patil|Published at:
SEBI InvIT Rules: इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी खबर! SEBI ने आसान किए उधार लेने के नियम, मिलेगी ज़्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी
Overview

SEBI ने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के लिए उधार लेने के नियमों में बड़ी ढील दी है। इस नए नियम के तहत, अब **49%** से ज़्यादा डेट (Debt) वाले InvITs कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex), एसेट एनहांसमेंट (Asset Enhancement) और बड़े मेंटेनेंस (Major Maintenance) के लिए फ्रेश बरोइंग (Fresh Borrowing) का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा, SEBI ने डेट को रिफाइनेंस (Refinance) करने की सुविधा भी दे दी है।

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प्रोजेक्ट्स और अपग्रेड्स के लिए ज़्यादा फंड

SEBI का यह फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स (Infrastructure Investment Vehicles) को ज़्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देने की दिशा में एक अहम कदम है। अब जिन InvITs पर उनकी एसेट वैल्यू के 49% से ज़्यादा का डेट (Debt) है, वे नए उधार को कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के ज़रिए अपनी एसेट्स की परफॉर्मेंस बढ़ाने, क्षमता बढ़ाने या बड़े मेंटेनेंस खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल कर पाएंगे। खासकर रोड प्रोजेक्ट्स के लिए यह राहत बड़ी होगी।

डेट रिफाइनेंसिंग संभव

इतना ही नहीं, SEBI ने मौजूदा डेट को रिफाइनेंस (Refinance) करने की सुविधा भी दी है। यह सहूलियत InvITs, उनके स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) या होल्डिंग कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी। हालांकि, इसके लिए कुछ सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। मूल लोन का इस्तेमाल रेगुलेशन के तहत मंजूर शुदा कामों के लिए ही हुआ हो। केवल प्रिंसिपल अमाउंट (Principal Amount) को ही रिफाइनेंस किया जा सकेगा, न कि बढ़े हुए इंटरेस्ट (Interest) या अन्य शुल्कों को।

स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) पर अहम स्पष्टीकरण

SEBI ने स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) को लेकर भी अहम स्पष्टीकरण दिया है। अगर किसी SPV का कंसेशन एग्रीमेंट (Concession Agreement) खत्म भी हो जाता है, तब भी कुछ खास शर्तों को पूरा करने पर वह अपना स्टेटस बरकरार रख सकेगी। ऐसे में, इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के पास किसी SPV को बेचने, लिक्विडेट (Liquidate) करने, मर्ज (Merge) करने या उसमें नया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जोड़ने के लिए ट्रिगर इवेंट (Trigger Event) से एक साल का वक्त होगा। इसमें रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) का समय शामिल नहीं होगा। तब तक, InvITs को अपनी एनुअल रिपोर्ट्स (Annual Reports) में निवेश की वैल्यू, प्रोजेक्ट डिटेल्स, देनदारियों (Liabilities) और प्रस्तावित स्ट्रैटेजी (Strategy) का विस्तृत खुलासा करना होगा।

निवेशकों के लिए क्या मायने

कुल मिलाकर, SEBI के इस कदम से InvITs, खासकर ज़्यादा लीवरेज (Leverage) वाले InvITs को ऑपरेशनल और फाइनेंशियल मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी। कैपिटल एक्सेस (Capital Access) और डेट मैनेजमेंट (Debt Management) में आसानी से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे बेहतर एसेट परफॉर्मेंस और नए प्रोजेक्ट्स की राह खुल सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.