प्रोजेक्ट्स और अपग्रेड्स के लिए ज़्यादा फंड
SEBI का यह फैसला इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट व्हीकल्स (Infrastructure Investment Vehicles) को ज़्यादा फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी देने की दिशा में एक अहम कदम है। अब जिन InvITs पर उनकी एसेट वैल्यू के 49% से ज़्यादा का डेट (Debt) है, वे नए उधार को कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) के ज़रिए अपनी एसेट्स की परफॉर्मेंस बढ़ाने, क्षमता बढ़ाने या बड़े मेंटेनेंस खर्चों को पूरा करने में इस्तेमाल कर पाएंगे। खासकर रोड प्रोजेक्ट्स के लिए यह राहत बड़ी होगी।
डेट रिफाइनेंसिंग संभव
इतना ही नहीं, SEBI ने मौजूदा डेट को रिफाइनेंस (Refinance) करने की सुविधा भी दी है। यह सहूलियत InvITs, उनके स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) या होल्डिंग कंपनियों के लिए उपलब्ध होगी। हालांकि, इसके लिए कुछ सख्त शर्तें भी लगाई गई हैं। मूल लोन का इस्तेमाल रेगुलेशन के तहत मंजूर शुदा कामों के लिए ही हुआ हो। केवल प्रिंसिपल अमाउंट (Principal Amount) को ही रिफाइनेंस किया जा सकेगा, न कि बढ़े हुए इंटरेस्ट (Interest) या अन्य शुल्कों को।
स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) पर अहम स्पष्टीकरण
SEBI ने स्पेशल पर्पज़ व्हीकल्स (SPVs) को लेकर भी अहम स्पष्टीकरण दिया है। अगर किसी SPV का कंसेशन एग्रीमेंट (Concession Agreement) खत्म भी हो जाता है, तब भी कुछ खास शर्तों को पूरा करने पर वह अपना स्टेटस बरकरार रख सकेगी। ऐसे में, इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के पास किसी SPV को बेचने, लिक्विडेट (Liquidate) करने, मर्ज (Merge) करने या उसमें नया इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जोड़ने के लिए ट्रिगर इवेंट (Trigger Event) से एक साल का वक्त होगा। इसमें रेगुलेटरी अप्रूवल (Regulatory Approval) का समय शामिल नहीं होगा। तब तक, InvITs को अपनी एनुअल रिपोर्ट्स (Annual Reports) में निवेश की वैल्यू, प्रोजेक्ट डिटेल्स, देनदारियों (Liabilities) और प्रस्तावित स्ट्रैटेजी (Strategy) का विस्तृत खुलासा करना होगा।
निवेशकों के लिए क्या मायने
कुल मिलाकर, SEBI के इस कदम से InvITs, खासकर ज़्यादा लीवरेज (Leverage) वाले InvITs को ऑपरेशनल और फाइनेंशियल मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी। कैपिटल एक्सेस (Capital Access) और डेट मैनेजमेंट (Debt Management) में आसानी से इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे बेहतर एसेट परफॉर्मेंस और नए प्रोजेक्ट्स की राह खुल सकती है।