बाजार नियामक SEBI ने बड़ा फैसला लेते हुए विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए KYC नियमों में ढील दी है, जो **1 दिसंबर, 2026** से लागू होंगे। वहीं दूसरी ओर, नियमों के उल्लंघन और गवर्नेंस में खामियों के चलते CDSL पर **₹1 करोड़** का भारी जुर्माना लगाया गया है।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने एक साथ दो बड़े फैसले लिए हैं। एक तरफ विदेशी निवेशकों के लिए काम आसान किया गया है, तो दूसरी तरफ प्रमुख डिपॉजिटरी CDSL के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है।
विदेशी निवेशकों के लिए नियमों में बड़ी ढील
1 दिसंबर, 2026 से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को अनुपालन (Compliance) के मोर्चे पर बड़ी राहत मिलेगी। SEBI ने KYC रिव्यू की अवधि को 1 साल से बढ़ाकर 2 साल कर दिया है। इसके अलावा, जो रिव्यू साइकिल पहले 3 साल का था, उसे अब 8 साल कर दिया गया है।
इस कदम का उद्देश्य फालतू के कागजी काम को कम करना और भारत में विदेशी निवेश को सुगम बनाना है। अब FPIs को रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल के दौरान बार-बार जानकारी जमा करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, सरकारी सिक्योरिटीज़ से जुड़े निवेशकों के लिए कुछ खास छूट और 10 साल की रिव्यू साइकिल जैसे नियम पहले की तरह ही लागू रहेंगे।
CDSL पर SEBI का डंडा
रेगुलेटर ने अपनी सख्ती दिखाते हुए CDSL पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह फैसला 2023-24 फाइनेंशियल ईयर के दौरान कंपनी के कामकाज की हुई जांच के बाद आया है।
SEBI के 102 पन्नों के आदेश में गवर्नेंस और ऑपरेशन्स से जुड़ी कई गंभीर कमियां पाई गई हैं। इनमें प्लेज रिक्वेस्ट (Pledge Request) रिजेक्शन का स्पष्ट कारण न बताना, क्लाइंट अनपेड सिक्योरिटीज अकाउंट (CUSA) के मैनेजमेंट में कमी और डेटा सुरक्षा से जुड़ी खामियां शामिल हैं। साथ ही, डिजास्टर रिकवरी ड्रिल्स को लेकर भी कंपनी मानकों पर खरी नहीं उतरी। CDSL को जुर्माना भरने के लिए 45 दिनों का समय दिया गया है।
