SEBI ने विदेशी निवेशकों (FPI) को बड़ी राहत दी है। 1 दिसंबर 2026 से कम जोखिम वाले निवेशकों के लिए KYC रिव्यू की समयसीमा को बढ़ाकर 8 साल कर दिया गया है, जिससे कामकाज में आसानी होगी।
भारतीय बाजार में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए मार्केट रेगुलेटर SEBI ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। 1 दिसंबर 2026 से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए 'नो योर कस्टमर' (KYC) रिव्यू के कड़े नियमों में ढील दी जा रही है।
क्या बदलेगा नियम?
फिलहाल, FPI को हर 1 से 3 साल के बीच KYC कंप्लायंस से गुजरना पड़ता है, जो कि काफी समय लेने वाली प्रक्रिया है। अब नए फ्रेमवर्क के तहत, कम जोखिम (Low-risk) वाले निवेशकों के लिए यह अवधि बढ़ाकर 8 साल कर दी गई है।
रिस्क प्रोफाइल के आधार पर वर्गीकरण:
- Category I निवेशक: ये सबसे कम जोखिम वाले होते हैं, जिन्हें अब 8 साल का लंबा विंडो मिलेगा।
- Category II निवेशक: कुछ रेगुलेटेड संस्थाओं को भी 8 साल का लाभ मिलेगा, जबकि बाकियों के लिए 2 साल की समयसीमा बनी रहेगी।
- हाई-रिस्क निवेशक: इनके लिए रेगुलेटर ने 2 साल की कड़ी निगरानी बनाए रखी है ताकि सुरक्षा मानकों से कोई समझौता न हो।
कागजी कार्रवाई से मिलेगी मुक्ति:
रेगुलेटर ने इस अनिवार्य घोषणा को भी खत्म कर दिया है कि रिन्यूअल के समय निवेशकों को बार-बार यह बताना होगा कि उनकी रजिस्ट्रेशन डीटेल्स में कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसके अलावा, SEBI और Reserve Bank of India (RBI) मिलकर SWIFT नेटवर्क के जरिए बैंक अकाउंट सर्टिफिकेशन को भी आसान बनाने पर काम कर रहे हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन फीस पहले की तरह ही एक्सपायरी से 15 दिन पहले जमा करनी होगी। यह बदलाव भारतीय मार्केट को ग्लोबल निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बनाने की एक बड़ी कोशिश है।
