SEBI ने विदेशी निवेशकों के लिए नियमों में बड़ी ढील दी है। 3 दिसंबर 2026 से FATF-अनुपालन वाले देशों के निवेशक बिना शारीरिक उपस्थिति के डिजिटल KYC के जरिए निवेश शुरू कर सकेंगे।
अब निवेश होगा सुपरफास्ट
सेबी (SEBI) ने नॉन-रेसिडेंट भारतीय (NRIs), विदेशी नागरिकों और ओवरसीज सिटीजन्स ऑफ इंडिया (OCIs) के लिए एंट्री बैरियर को कम कर दिया है। 3 दिसंबर 2026 से, उन देशों के निवेशक जो फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के मानकों का पालन करते हैं, वे पूरी तरह से डिजिटल तरीके से KYC पूरा कर पाएंगे। इससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला लंबा समय बचेगा।
KYC रिकॉर्ड्स की पोर्टेबिलिटी
इस नए ढांचे की सबसे बड़ी खासियत KYC रिकॉर्ड्स की पोर्टेबिलिटी है। एक बार वेरीफाई होने के बाद, निवेशक के क्रेडेंशियल्स को अलग-अलग फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज के साथ साझा किया जा सकेगा, जिससे बार-बार डॉक्यूमेंटेशन की जरूरत खत्म हो जाएगी। यह डेटा स्टैंडर्ड्स बनाए रखने के लिए सेंट्रल KYC रिकॉर्ड्स रजिस्ट्री और KYC रजिस्ट्रेशन एजेंसियों के जरिए मैनेज किया जाएगा।
FPIs के लिए भी राहत
नियामक ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भी अनुपालन नियमों को सरल किया है। 1 दिसंबर 2026 से KYC रिव्यू साइकिल को रिस्क कैटेगरी के हिसाब से 2 या 8 साल के लिए तय किया गया है। साथ ही, अब FPIs को रजिस्ट्रेशन के दौरान 'नो-चेंज डिक्लेरेशन' सबमिट करने की मजबूरी नहीं होगी।
इंटरमीडियरीज पर कड़ी नजर
भले ही प्रक्रिया डिजिटल हो गई है, लेकिन जिम्मेदारी इंटरमीडियरीज की बनी रहेगी। सेबी ने अनिवार्य किया है कि कंपनियां वीडियो-आधारित सत्यापन (Video-based verification) करें और डेटा को 3 वर्किंग डेज के भीतर संबंधित एजेंसियों को भेजें। सुरक्षा के मद्देनजर, ये प्रक्रियाएं लगातार ऑडिट के दायरे में रहेंगी। ध्यान रहे, यह छूट केवल FATF-अनुपालन वाले अधिकार क्षेत्रों पर लागू होगी, जबकि अन्य के लिए पुरानी कड़े नियम ही जारी रहेंगे।
