SEBI का बड़ा फैसला: करेंसी डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियमों में दी ढील, अब **$5 मिलियन** तक की लिमिट तय

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI का बड़ा फैसला: करेंसी डेरिवेटिव ट्रेडिंग के नियमों में दी ढील, अब **$5 मिलियन** तक की लिमिट तय

SEBI ने करेंसी डेरिवेटिव्स ट्रेड करने वाले निवेशकों के लिए नियमों को आसान बना दिया है। अब डोमेस्टिक और विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर के **$5 मिलियन** तक की पोजीशन ले सकते हैं।

नियमों में बदलाव का क्या मतलब है?

5 नवंबर, 2026 को बाजार नियामक SEBI ने करेंसी डेरिवेटिव्स के फ्रेमवर्क में बड़ा अपडेट जारी किया है। अब डोमेस्टिक इन्वेस्टर और FPIs कुल $5 मिलियन (नोशनल वैल्यू) तक की लॉन्ग या शॉर्ट पोजीशन बिना किसी सबूत (अंडरलाइंग एक्सपोजर) के रख सकते हैं। यह नियम देश के सभी स्टॉक एक्सचेंजों पर लागू होने वाले रुपया-बेस्ड करेंसी पेयर्स के लिए है।

RBI के साथ तालमेल

यह फैसला RBI के 10 अक्टूबर, 2026 के सर्कुलर के अनुरूप है। इस कदम का मुख्य मकसद रिटेल और मीडियम साइज के इंस्टीट्यूशनल पार्टिसिपेंट्स के लिए कंप्लायंस के बोझ को कम करना है। इससे मार्केट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और ट्रेडर्स के लिए विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सेगमेंट तक पहुंचना आसान होगा।

बड़े ट्रेडर्स के लिए शर्तें अभी भी सख्त

ध्यान दें कि $5 मिलियन की यह छूट केवल छोटे स्तर के ट्रेडर्स के लिए है। अगर FPIs को इस लिमिट से ऊपर लॉन्ग पोजीशन रखनी है, तो उन्हें इंडियन डेट या इक्विटी सिक्योरिटीज (म्यूचुअल फंड यूनिट्स सहित) में अंडरलाइंग एक्सपोजर दिखाना अनिवार्य होगा। इसी तरह, डोमेस्टिक क्लाइंट्स को भी $5 मिलियन से ज्यादा की ट्रेडिंग के लिए RBI के रिस्क मैनेजमेंट दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा।

सिस्टम में होगा बदलाव

SEBI ने सभी स्टॉक एक्सचेंजों और क्लियरिंग कॉरपोरेशन्स को इन नियमों को तुरंत सिस्टम में इंटीग्रेट करने का निर्देश दिया है। अब निवेशकों को अपनी सभी एक्सचेंजों पर कुल ओपन पोजीशन को ट्रैक करना होगा ताकि वे तय सीमा के भीतर रहकर रेगुलेटरी दिक्कतों से बच सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.