SEBI ने इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स के साथ काम करने वाले रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए अनिवार्य कॉल रिकॉर्डिंग के नियम को **8 नवंबर** से खत्म करने का फैसला किया है। हालांकि, ईमेल और एसएमएस जैसे अन्य डिजिटल रिकॉर्ड्स को **5 साल** तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंप्लायंस के मोर्चे पर एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। 8 नवंबर, 2026 से रिसर्च एनालिस्ट्स और ब्रोकरेज फर्मों को इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स के साथ होने वाली हर बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग रखने की जरूरत नहीं होगी। इस कदम का मुख्य मकसद मार्केट इंटरमीडियरीज पर पड़ने वाले ऑपरेशनल बोझ को कम करना और कामकाज को आसान बनाना है।
डिजिटल ऑडिट ट्रेल पर रहेगा जोर
ऑडियो रिकॉर्डिंग की अनिवार्यता खत्म होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि अब बातचीत पर कोई निगरानी नहीं रहेगी। SEBI ने स्पष्ट किया है कि एक पुख्ता 'ऑडिट ट्रेल' (Audit Trail) बनाए रखना अब भी अनिवार्य है। एनालिस्ट्स को क्लाइंट्स के साथ हर इंटरेक्शन का प्रूफ रखना होगा। इसके लिए फिजिकल डॉक्यूमेंट्स, वेरिफाइड आईडी से आए ईमेल और एसएमएस लॉग्स जैसे माध्यमों को वैध माना जाएगा।
रेगुलेटर का मानना है कि यदि ट्रांजैक्शन या रिकमेंडेशन पहले से ही ईमेल जैसे डिजिटल चैनल्स पर डॉक्यूमेंटेड है, तो ऑडियो रिकॉर्डिंग रखना एक अतिरिक्त बोझ है। यह बदलाव आधुनिक डिजिटल संचार के महत्व को स्वीकार करता है, जिससे फर्मों को हजारों घंटे की ऑडियो फाइलें स्टोर करने के झंझट से मुक्ति मिलेगी।
नियमों का पालन जारी
इस राहत के बावजूद, फर्मों को डेटा रिटेंशन की सख्त पॉलिसी का पालन करना होगा। रिसर्च एंटिटीज को सभी इंटरेक्शन रिकॉर्ड कम से कम 5 साल तक सुरक्षित रखने होंगे। यह सुनिश्चित करता है कि रेगुलेटरी रिव्यू या किसी मार्केट इन्वेस्टिगेशन के दौरान डेटा आसानी से उपलब्ध रहे।
इसके अलावा, यदि क्लाइंट और रिसर्च हाउस के बीच कोई विवाद होता है, तो मामले के सुलझने तक फर्म को सभी संचार रिकॉर्ड्स संभाल कर रखने होंगे। साथ ही, किसी भी जांच के दौरान SEBI आवश्यकता पड़ने पर विशिष्ट रिकॉर्ड्स की मांग कर सकता है। कुल मिलाकर, यह कदम 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और पारदर्शिता के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है।
