SEBI ETF Rule Change: इंटरनेशनल फंड्स में प्रीमियम का खेल, कहीं आप भी तो नहीं फंस गए?

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AuthorMehul Desai|Published at:
SEBI ETF Rule Change: इंटरनेशनल फंड्स में प्रीमियम का खेल, कहीं आप भी तो नहीं फंस गए?

7 सितंबर, 2026 से लागू हुए नए नियमों के बाद से कई इंटरनेशनल ETFs अपनी वास्तविक वैल्यू से काफी महंगे दाम पर ट्रेड कर रहे हैं। RBI की पाबंदियों के कारण नई यूनिट्स नहीं बन पा रही हैं, जिससे सप्लाई और डिमांड का संतुलन बिगड़ गया है।

नियम में बदलाव और असर

SEBI द्वारा 7 सितंबर, 2026 को लागू किया गया नया फ्रेमवर्क इंटरनेशनल फंड्स के निवेशकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पहले ETFs के प्राइस बैंड T-2 NAV के आधार पर तय होते थे, लेकिन अब इसे पिछले दिन के क्लोजिंग वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पर शिफ्ट कर दिया गया है। इसी बदलाव ने मार्केट में प्राइस डिस्टॉर्शन पैदा कर दिया है।

क्यों बढ़ रहा है प्रीमियम?

आमतौर पर मार्केट मेकर्स डिमांड के हिसाब से नई यूनिट्स बनाकर ETF की कीमत को उसकी नेट एसेट वैल्यू (NAV) के करीब रखते हैं। लेकिन RBI की ओवरसीज इन्वेस्टमेंट लिमिट्स ने AMCs के हाथ बांध दिए हैं। नई यूनिट्स नहीं बन सकतीं, इसलिए डिमांड बढ़ने पर भी सप्लाई फिक्स रहती है। इसका नतीजा यह होता है कि शेयर की कीमत उसकी असल वैल्यू से काफी ऊपर चली जाती है, जिसे हम 'प्रीमियम' कहते हैं।

निवेशकों के लिए बड़ा रिस्क

इसका सबसे बड़ा उदाहरण Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF है, जो हाल ही में 96% तक के प्रीमियम पर ट्रेड करता दिखा है। यह प्रीमियम निवेशक के लिए एक छुपी हुई लागत है। अगर आप आज किसी इंटरनेशनल ETF को उसके NAV से बहुत ज्यादा कीमत पर खरीदते हैं, तो भविष्य में प्रीमियम कम होने पर आपको बड़ा नुकसान हो सकता है—भले ही ग्लोबल मार्केट (Nasdaq या S&P 500) अच्छा प्रदर्शन कर रहे हों।

क्या करें निवेशक?

सिर्फ ट्रेडिंग ऐप पर दिखने वाले Last Traded Price (LTP) पर भरोसा न करें। निवेश करने से पहले स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर जाकर Indicative NAV (iNAV) जरूर चेक करें। अगर मार्केट प्राइस iNAV से बहुत ज्यादा है, तो प्रीमियम के कम होने का इंतजार करना ही समझदारी है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.