SEBI का बड़ा ऐलान: इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की कॉल्स की रिकॉर्डिंग अब अनिवार्य नहीं

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का बड़ा ऐलान: इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स की कॉल्स की रिकॉर्डिंग अब अनिवार्य नहीं

SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट्स को बड़ी राहत दी है। अब इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (Institutional Investors) के साथ होने वाली बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग रखना अनिवार्य नहीं होगा, लेकिन रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए पुराने नियम जारी रहेंगे।

बाजार नियामक की ओर से बड़ी राहत

SEBI ने अपने नए सर्कुलर में रिसर्च एनालिस्ट्स के लिए नियमों को आसान बना दिया है। अब बैंकों, इंश्योरेंस कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स जैसे इंस्टीट्यूशनल क्लाइंट्स के साथ होने वाली बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग रखना जरूरी नहीं है। रेगुलेटर का मानना है कि ये बड़े संस्थान खुद अपना ड्यू डिलिजेंस (due diligence) करने में सक्षम हैं, जिससे रिसर्च फर्म्स का ऑपरेशनल खर्च और कंप्लायंस का बोझ कम होगा।

रिटेल निवेशकों के लिए नियम सख्त

SEBI ने साफ कर दिया है कि आम निवेशकों यानी रिटेल इन्वेस्टर्स की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। रिसर्च एनालिस्ट्स को रिटेल क्लाइंट्स के साथ अपनी हर बातचीत की ऑडियो लॉग्स रखना अनिवार्य होगा। रेगुलेटर का तर्क है कि रिटेल निवेशकों के पास मार्केट डेटा और एक्सपर्ट सपोर्ट कम होता है, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए पारदर्शी रिकॉर्डिंग जरूरी है।

अब क्या होगा रिकॉर्ड्स का?

भले ही ऑडियो रिकॉर्डिंग की बाध्यता खत्म हो गई है, लेकिन एनालिस्ट्स को अब भी बाकी डिजिटल कम्युनिकेशंस जैसे ईमेल और SMS का रिकॉर्ड रखना होगा। इन इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को कम से कम 5 साल तक सुरक्षित रखना अनिवार्य है। विवाद या किसी खास रेगुलेटरी जांच के मामलों में इन रिकॉर्ड्स को और लंबी अवधि तक संभालकर रखना पड़ सकता है। यह कदम मार्केट में 'रिस्क-प्रोपोर्शनेट' मॉडल की ओर एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.