बाजार नियामक SEBI ने Adani Group के खिलाफ चल रही मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग (MPS) जांच को आधिकारिक रूप से बंद कर दिया है। रेगुलेटर को विनोद अडानी द्वारा विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) पर नियंत्रण रखने के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, जिससे ग्रुप के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
SEBI ने अपनी जांच में यह पाया कि विनोद अडानी द्वारा दो विशिष्ट विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) पर 'de facto' नियंत्रण रखने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। इस फैसले के साथ ही उन आरोपों को खारिज कर दिया गया है कि ये FPIs प्रमोटर ग्रुप के लिए फ्रंट की तरह काम कर रहे थे, जो कि लिस्टेड कंपनियों के 25% पब्लिक फ्लोट नियम का उल्लंघन माना जाता।
जांच का मुख्य बिंदु
जांच इस बात पर केंद्रित थी कि क्या ये ऑफशोर संस्थाएं स्वतंत्र थीं या प्रमोटर ग्रुप इनके फैसलों को निर्देशित कर रहा था। SEBI ने स्पष्ट किया कि केवल बिजनेस या फाइनेंशियल संबंध होने का मतलब 'कंट्रोल' होना नहीं है। इससे पहले इस मामले में ₹1,984 करोड़ के संभावित लाभ को लेकर नोटिस जारी किया गया था, जो अब खत्म हो गया है।
कार्रवाई और जुर्माना
हालांकि मुख्य आरोप खारिज कर दिए गए हैं, लेकिन SEBI ने जानकारी देने में चूक के लिए नासिर अली शबान अहली और चांग चुंग-लिंग पर ₹20-20 लाख का जुर्माना लगाया है। साथ ही, जांच से जुड़ी 18 अन्य संस्थाओं ने सेटलमेंट मैकेनिज्म के जरिए अपने मामलों को सुलझा लिया है।
निवेशकों पर असर
इस खबर से Adani Group के ऊपर से एक बड़ा रेगुलेटरी दबाव हट गया है, जिसने लंबे समय से संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) के बीच अनिश्चितता पैदा कर रखी थी। अब मार्केट का फोकस वापस ग्रुप के ऑपरेशन्स, डेट रिडक्शन और भविष्य के विस्तार प्लान पर केंद्रित हो सकता है।
