SEBI ने मार्केट की सुरक्षा और रिटेल निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए एक एडवांस सर्विलांस सिस्टम तैयार किया है। इसका मुख्य मकसद बाजार में मौजूद खराब फंडामेंटल वाली कंपनियों की पहचान करना और उन्हें डिलीस्ट करना है। विशेष रूप से SME सेगमेंट पर नजर है, जहां **2026** में अब तक **156** IPO आ चुके हैं।
बाजार की सफाई का नया दौर
SEBI अब ट्रेडिंग पैटर्न के बजाय कंपनियों के लॉन्ग-टर्म गवर्नेंस और फंडामेंटल मजबूती पर ज्यादा ध्यान दे रही है। यह नया सर्विलांस सिस्टम उन कंपनियों की पहचान करेगा जो पब्लिक लिस्टिंग के लायक नहीं हैं। अगर कोई कंपनी मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो उसे सीधे डिलीस्टिंग (Delisting) का सामना करना पड़ सकता है।
SME सेगमेंट पर क्यों है फोकस?
साल 2026 में अब तक 156 SME IPO आ चुके हैं, जिससे बाजार में पैसा तो खूब आया है, लेकिन क्वालिटी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। कई छोटी कंपनियां बिना ठोस बिजनेस मॉडल के लिस्ट हो रही हैं, जो निवेशकों के लिए रिस्की साबित हो रहा है।
'Project Jagrook' और नई गाइडलाइन्स
SEBI के होल-टाइम मेंबर कमलेश वार्ष्णेय ने साफ किया है कि बाजार में भागीदारी बढ़ाना लक्ष्य है, लेकिन सुरक्षा से समझौता नहीं होगा। भारत में अभी सिर्फ 9.5% परिवार ही शेयर बाजार में निवेश करते हैं।
- Project Jagrook: जमीनी स्तर पर फाइनेंशियल लिटरेसी बढ़ाने के लिए यह नई पहल शुरू की गई है।
- ब्रोकर्स के लिए नया नियम: 5 अक्टूबर 2026 से सभी ब्रोकर्स को अपने प्लेटफॉर्म पर इन्वेस्टर अवेयरनेस मैसेज दिखाना अनिवार्य होगा।
आने वाले समय में SME IPO के लिए मंजूरी की प्रक्रिया और अधिक सख्त हो सकती है। निवेशकों को अब उन्हीं कंपनियों पर दांव लगाना चाहिए जो बेहतर गवर्नेंस और मजबूत फंडामेंटल के पैमाने पर खरी उतरती हैं।
